पश्चिम यूपी के दलित नेता चंद्रशेखर कांग्रेस के कितना काम आ सकते हैं ?

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सहारनपुर: प्रियंका गांधी ने मेरठ के एक निजी अस्पताल में भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर से मुलाकत की तो सियासी सरगर्मी बढ़ गई. इस मुलाकात के दौरान प्रियंका के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, विधानमंडल के नेता अजय कुमार लल्लू थे.

प्रियंका गांधी ने कहा कि उनकी इस मुलाकात को राजनीति से जोड़ कर न देखा जाए. लेकिन जब हर चीज राजनीति से जुड़ी है तो फिर ये मुलाकात राजनीति से क्यों न जोड़ी जाए. दरअसल चंद्रशेखर पश्चिम यूपी में तेजी से लोकप्रिय हुए हैं. वो युवा हैं और लगातार अपनी कम्यूनिटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. खबर है कि प्रियंका गांधी ने चंद्रशेखर से सहारनपुर से कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद की राय पर की है. चुंकि इमरान और चंद्रशेखर के रिश्ते अच्छे हैं और इसका फायदा कांग्रेस को हो सकता है.

क्या कहते हैं पश्चिम यूपी के आंकड़े ?

जिस इलाके से चंद्रशेखर आते हैं वहां पर भीम आर्मी मजबूत है और दलित-मुस्लिम यूनिटी की पक्षधर है. दलित-मुस्लिम और जाट वोट वाले इस इलाके में चंद्रशेखर की अहम भूमिका हो जाती है. यूपी में लगभग 21% दलित और 20% मुस्लिम हैं लिहाजा चंद्रशेखर को किसी रिजर्व सीट से कांग्रेस चंद्रशेखर को टिकट ऑफर कर सकती है. हालांकि चंद्रशेखर पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी से लड़ना चाहते हैं.

कौन हैं चंद्रशेखर आजाद?

चंद्रशेखर आजाद 2017 में उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलितों और सवर्णों के बीच झड़प हुई थी. इस झड़प में भीम आर्मी का नाम आया था और उन्हें जेल जाना पड़ा है. करीब 6 साल पहले चंद्रशेखर ने भीम आर्मी का गठन किया था. चंद्रशेकर ने अपना उपनाम ‘रावण’ रखा था जिसे उन्होंने बाद में अपने नाम से हटा दिया. चंद्रशेखर का जन्म सहारनपुर में छुटमलपुर के पास धडकूलि गांव में हुआ था. वकालत करने के बाद वो 2015 में सुर्खियों में आए.  उनके गांव के आगे एक बोर्ड लगा था जिसमें लिखा था धडकूलि वेलकम यू द ग्रेट चमार्स. इस कदम ने गांव में दलितों और ठाकुर के बीच तनाव पैदा कर दिया था.

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