‘कोटा’ की काट है सपा-बसपा गठबंधन का ये गणित 

चुनावी मौसम में सभी राजनीतिक दल अपने अपने गणित के हिसाब से तैयारी कर रहे हैं. सपा-बसपा गठबंधन ने जिस गणित को ध्यान में रखकर तैयारी की है उसमें मुसलमान वोट की बड़ी भूमिका है. यूपी 80 लोकसभा सीटों में से 32 सीटें ऐसी हैं जहां पर हार-जीत मुसलमान वोटबैंक तय करता है.

अगर पिछले तीन उप चुनावों के आंकड़ों को देखें तो एक बात साफ साफ नजर आती है कि सपा-बसपा गठजोड़ के बाद उनका वोट प्रतिशत का आंकड़ा बढ़ा है. गठबंधन मुसलमान, यादव, दलित और पिछड़े वर्ग की कुछ जातियों के मतदाताओं को साधकर बीजेपी का सफाया करने की तैयारी कर रहा है. 2014 के चुनावों में मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के वोट में बिखराव ने ही मोदी के पीएम बनने का रास्ता साफ हुआ.

मुसलमान वोट की बात करें 2014 के लोकसभा चुनाव में राज्य की मुस्लिम बहुल 32 संसदीय सीटों में से 30 पर बीजेपी जीती थी. सिर्फ दो सीटों पर सपा की जीत हुई. अब जब सपा-बसपा साथ साथ आ गए हैं और दोनों पार्टियों को कोर वोट मुसलमान रहा है ऐसे में ये दोनों पार्टियों को उम्मीद है कि इन 32 सीटों का गणित उनके पक्ष में होगा. अगर इस आंकडे से देखें तो बीजेपी को सभी 30 सीटों पर हार का सामना करना पड़ सकता है. कैराना में हमने ये झलक देखी है.

यूपी में करीब 19.5 फीसदी मुस्लिम आबादी है. ये आबादी 32 संसदीय सीटों और करीब 125 विधान सभा सीटों पर अपना असर रखती है. जिन 30 सीटों पर ये वोट हार जीत तय करता है वहां उनकी तादाद 15 फीसदी से ज्यादा है. पश्चिमी यूपी में तो करीब एक दर्जन सीटें ऐसी हैं जहां पर 30 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं.

मुरादाबाद (45%), बिजनौर (38%), अमरोहा (37%), रामपुर (49%), मेरठ (31%), संभल (46%), नगीना (42%) सहारनपुर (39%), कैराना (39%), मुजफ्फरनगर (37%) और बागपत (25%) शामिल हैं. ये वो सीटें हैं जहां 2014 में बीजेपी जीती थी.

इन सीटों के अलावा करीब 18 सीटें ऐसी हैं जहां पर 15 से 20 फीसदी मुसलमान वोट है. इनमें बहराइच, बरेली, श्रावस्ती, बदायूं, पीलीभीत, आजमगढ़, गोंडा, गाजियाबाद, अलीगढ़, डुमरियागंज, वाराणसी प्रमुख संसदीय सीटे हैं. आजमगढ़ और बदायूं में ही सपा जीती है. बाकी पर बीजेपी की जीत हुई थी. अब समीकरण बदले हैं और गठबंधन फैक्टर का असर ये होगा कि ये सभी सीटें गठबंधन के खाते में जा सकती हैं.

आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि कैराना सीट पर 2014 में बीजेपी को कुल 50.54% वोट मिले थे. सपा को 29.49%, बसपा को 14.33% और रालोद को 3.81 फीसदी वोट मिले थे लेकिन बीते साल हुए उपचुनाव में सपा-बसपा और रालोद ने यहां पर 51 फीसदी वोट हासिल किए. और बीजेपी को 46 फीसदी वोट मिले थे.

गोरखपुर उप चुनावों में भी गठबंधन को 49 फीसदी तो बीजेपी को 47 फीसदी और ओबीसी बहुल फुलपुर में गठबंधन को 47 फीसदी तो बीजेपी को मात्र 39 फीसदी वोट मिले थे. अब आप इन आंकड़ों को देखें तो आसानी से एक बात समझ आ रही है कि ये गठबंधन बीजेपी को यूपी में साफ करने का दम रखता है.

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