मोदी के ‘मिशन साउथ’ का मकसद क्या है?

“यूडीएफ और एलडीएफ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. ये सिर्फ नाम से अलग हैं लेकिन दोनों जातिवाद, सांप्रदायिकता और संस्कृति को बर्बाद करने के मामले में एक जैसे हैं. दोनों राजनीतिक हिंसा में शामिल रहते हैं और केरल के लोगों को धोखा देते हैं.”

कोल्लम में मोदी ने अपने मिशन साउथ की शुरुआत की और सीधे सीधे कांग्रेस और वाम मोर्चे वाली सरकार पर तीखा हमला किया. मोदी सोची समझी रणनीति के तहत साउथ पर फोकस कर रहे हैं. मोदी जानते हैं कि अगर उत्तर भारत के नुकसान की भरपाई करनी है तो दक्षिण, पूर्वी और उत्तर पूर्वी राज्यों में बीजेपी को मजबूत करना होगा. एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सत्ता गंवाने और यूपी में अखिलेश-माया के गठबंधन के बाद मोदी जानते हैं कि उन्हें इन राज्यों में नुकसान होगा और इसकी भरपाई मोदी दक्षिण और पूर्वोत्तर के राज्यों से करना चाहते हैं.

दक्षिण भारत में कर्नाटक में बीजेपी की पकड़ अच्छी है. और इन दिनों तो बीजेपी वहां पूरी कोशिश कर रही है कि जेडीएस और कांग्रेस का गठंबधन टूटे और बीजेपी सरकार बनाने का दावा करे. बीजेपी की कोशिश ये भी है कि कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पैर जमाए जाएं. बीजेपी के तमिलनाडु में AIADMK से अच्छे रिश्ते हैं. इसके अलावा केरल में सबरीमाला का मुद्दा उठाकर वो लोगों की भावनाओं को वोट में तब्दील करना चाहते हैं.

मोदी ने यहां अपने भाषण में कहा कि त्रिपुरा में उन्होंने जीरो से सरकार बनाने तक का काम किया. केरल में भी वो सरकार बनाएंगे. लेकिन मोदी को ये समझना चाहिए केरल लेफ्ट का गढ है और वहां पर बीजेपी के पैर जमाना आसान नहीं है. पथानामथिट्टा, जहां सबरीमला है, वहां तगड़े चुनावी प्रचार के बावजूद बीजेपी को पंचायती चुनाव में सिर्फ़ सात और 12 वोट मिले. मोदी ने अपने केरल दौरे पर पद्मनाभस्वामी मंदिर का दौरा किया, नेशनल हाईवे-66 पर बने कोल्लम बाईपास को देश को समर्पित किया, 13 किलोमीटर लंबे इस दो लेन के बाइपास के बनने से अलाप्पुज़ा और तिरुअनंतपुरम के बीच दूरी कम होगी.

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