सुप्रीम कोर्ट के फैसले 17 नवंबर तक देश में काफी कुछ बदल सकते हैं!

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. 17 नवंबर तक जस्टिस गोगोई को कई महत्वपूर्ण और बड़े फैसले सुनाने हैं . इसमें राम मंदिर से जुड़ा हुआ मामला भी है और रफाल से जुड़ा हुआ मुकदमा भी शामिल है.

सुप्रीम कोर्ट 4 नवंबर से लेकर 15 नवंबर तक राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर अपना फैसला सुनाएगा. यह फैसला ऐतिहासिक होने वाला है और पूरे देश की निगाहें इस पर टिके हैं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का चाहे जो भी फैसला है वह देश की दशा और दिशा तय करने वाला होगा.उम्मीद जताई जा रही है कि पांच जजों वाली संवैधानिक बेंच इस मामले पर 4-15 नवंबर के बीच फ़ैसला सुनाएगी. बेंच की अगुवाई सीजेआई रंजन गोगोई कर रहे हैं. उनके अलावा जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अब्दुल नज़ीर शामिल हैं.

अयोध्या मामले के अलावा, कुछ दूसरे महत्वपूर्म मामले भी हैं, जिन पर जस्टिस रंजन गोगोई अपने दो हफ़्तों में फ़ैसला सुनाएंगे. इनमें रफ़ाल डील से जुड़ा हुआ मामला भी शामिल है. सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई गोगोई की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच रफ़ाल सौदा मामले पर फ़ैसला सुनने वाली है. बेंच में जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ़ हैं. लोकसभा चुनाव से पहले रफाल डील का मामला काफी जोर-शोर से विपक्ष उठा रहा था लेकिन चुनाव के नतीजों के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया अब अगर सुप्रीम कोर्ट इस पर कोई फैसला देता है तो यह एक बार फिर से सुर्खियों में आ जाएगा.

रफ़ाल डील मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर, 2018 को दिए अपने फ़ैसले में भारत की केंद्र सरकार को क्लीन चिट दे दी थी. हालांकि इस फ़ैसले की समीक्षा के लिए अदालत में कई याचिकाएं दायर की गईं और 10 मई, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था. फ़्रांस से 36 रफ़ाल फ़ाइटर जेट के भारत के सौदे को चुनौती देने वाली जिन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की, उनमें पूर्व मंत्री अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की याचिकाएं शामिल थीं.

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बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि पर बाद के अलावा राफेल का मामला भी बेहद महत्वपूर्ण है. इन दोनों ही मुकदमा पर सुप्रीम कोर्ट का चाहे जो भी फैसला होगा वह देश में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा राजनीतिक तौर पर भी और वैचारिक तौर पर भी यह मामले बेहद महत्वपूर्ण हैं.

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