पुलिस-वकील पिटाई: भीड़तंत्र और भेड़िया तंत्र में तब्दील हो गया है हिंदुस्तान का लोकतंत्र!

पुलिस की तादाद ज्यादा थी तो पुलिस वालों ने वकीलों को पीट दिया और जब वकीलों की तादाद ज्यादा थी तो उन्होंने मिलकर पुलिस को पीट दिया. दिल्ली के तीस हजारी यही तमाशा चल रहा है. ना न्याय बचा न्यायपालिका बची. देश की राजधानी में पुलिस और वकीलों की पिटाई का मामला ऐसा है जैसे अब हिंदुस्तान में भीड़ तंत्र और भेड़िया तंत्र ही बचा है लोकतंत्र मर गया है.

बात 2 नवंबर की है उस दिन शनिवार का दिन था और दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में पार्किंग को लेकर पुलिस और वकीलों के बीच विवाद हो गया. यह विवाद इतना बड़ा कि मारपीट हो गई. मारपीट झड़प में तब्दील हो गई और पुलिस का कहना यह है कि तीसरी बटालियन के जवानों और वकीलों के बीच पार्किंग को लेकर यह विवाद हुआ था. दिल्ली उत्तर के अतिरिक्त डीसीपी हरेंद्र सिंह बताते हैं कि वकीलों का जमघट लॉकअप में आना चाहता था और जब जवानों ने उन्हें रोका तो वकील नाराज हो गए.

वह बताते हैं, हमने लॉक-अप को अंदर से बंद करके रखा जिससे हमारे जवानों के साथ-साथ कोर्ट में पेश होने आए क़ैदियों को भी सुरक्षित किया गया. वकील उस लॉक-अप को तोड़ना चाहते थे लेकिन जब वो इसमें कामयाब नहीं हुए तो उन्होंने आग लगाकर उसे तोड़ने की कोशिश की. उन्होंने गेट के पास दो-तीन बाइकों को भी आग लगा दी थी.

यह तो पुलिस का पक्ष है लेकिन वकील पुलिस के इस तथ्य से इत्तफाक नहीं रखते वकीलों का कहना यह है कि पुलिस वालों ने वकीलों के साथ पार्किंग को लेकर बुरा बर्ताव किया.बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “पार्किंग के विवाद पर पुलिस ने वकीलों के साथ बहुत ही बुरा बर्ताव किया. पुलिस ने मासूम वकीलों पर फ़ायरिंग शुरू कर दी. बार काउंसिल इसे बिलकुल बरदाश्त नहीं करेगा. हमने पुलिस के उच्च अधिकारियों और सरकार से मांग की है कि आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ़्तार किया जाए और उन्हें सस्पेंड किया जाए. अगर ऐसा नहीं होता है तो हालात और ज़्यादा ख़राब हो सकते हैं.”

तीस हजारी कोर्ट में हुई घटना से आहत वकील हुए उससे कहीं ज्यादा हाथ दिल्ली पुलिस हो गई और इसका असर मंगलवार को भी दिखाई दिया. मंगलवार की सुबह से ही आईटीओ स्थित दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर भारी संख्या में पुलिस के जवानों का विरोध प्रदर्शन करीब 11 घंटे चलने के बाद थम गया है. एक लंबी धरने के बाद आखिरकार पुलिस कर्मियों ने आला अधिकारियों से बातचीत की और धरने को खत्म करने का ऐलान किया. धरना यह कहते हुए खत्म किया गया है कि आला अधिकारियों ने पुलिस कर्मियों की मांगें मान ली है. हालांकि इससे पहले दिन में दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट सीपी राजेश खुराना ने पुलिसवालों से धरना ख़त्म करने की अपील की थी लेकिन पुलिसकर्मियों ने ज्वाइंट सीपी के सामने ‘वी वांट जस्टिस’ के नारे लगाए थे.

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अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह सब हो क्या रहा है दिल्ली पुलिस जो कि उपराज्यपाल के अधीन काम करती है जिसके मुखिया गृह मंत्री अमित शाह हैं. शाह के ही आदेश को बांधकर दिल्ली पुलिस काम करती है इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी गृहमंत्री का इसको लेकर कोई बयान नहीं आया है. अभी तक तो आम आदमी ही इस भीड़तंत्र का शिकार हो रहे थे लेकिन अब आलम यह है कि पुलिस वाले वकील जो भी भीड़ होती है वह बहुत जल्द भेड़िया तंत्र में तब्दील हो जाती है और लोकतंत्र का मजाक बनाती है.

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