लोकसभा चुनाव 2019: पहले चरण में बीजेपी को फायदा पहुंचा सकते हैं विपक्षी दल

यूपी में पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 80 में से 73 लोकसभा सीटें जीती थीं. लेकिन उसके बाद हुए उपचुनाव में विपक्षी एकता ने बीजेपी को ना सिर्फ पटखनी दी बल्कि उसके वो सीटें छीन लीं जहां उनका मजबूत गढ़ था. लेकिन अब हालात बदलने लगे हैं.

2014 में हुआ लोकसभा चुनाव के बाद हुए उपचुनाव में सपा-बसपा, आरएलडी ने मिलकर बीजेपी को बुरी तरह से हराया. इस गठबंधन की जीत ने ये साफ किया था कि अगर दल दिमाग से मुकाबला करेंगे तो 2019 में बीजेपी को पटखनी दे सकते हैं. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और लग रहा है कि 11 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान में बीजेपी को विपक्षी दल फायदा पहुंचा सकते हैं.

चुनाव करीब आने के साथ भी कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है. इससे बीजेपी को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है. यूपी में सभी दलों ने पहले और दूसरे चरण के लिए प्रत्याशियों का एलान हो गया है और इसमें बीजेपी फायदा में दिखाई दे रही है. पहले चरण में सहारनपुर, बिजनौर, मेरठ, अमरोहा जैसी सीटों प मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है.

मेरठ

मेरठ लोकसभा सीट से कांग्रेस ने हरेंद्र अग्रवाल को, बीजेपी ने राजेंद्र अग्रवाल को टिकट दिया है. जाट+मुस्लिम यहां निर्णायक भूमिका में हैं, इस सीट से बसपा ने हाजी मोहम्मद याकूब को टिकट दिया है. कुल मिलाकर यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने वाला है.

अमरोहा

कांग्रेस ने बसपा से आए वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन को टिकट देकर वहां की सीट पर भी त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है. वहीं मुरादाबाद और बदायूं में भी मुकाबला कुछ ऐसा ही दिख रहा है. क्योंकि यहां कांग्रेस ने भी मजबूत प्रत्याशियों को टिकट दिया है. बीजेपी यही चाहती थी कि किसी तरह मुकाबला त्रिकोणीय हो जाए और वो इसका फायदा उठा ले.

सहारनपुर

सहारनपुर में कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद को मजबूत हैं. इमरान मसूद को भीम आर्मी का भी समर्थन मिल सकता है. ऐसे में दलित+मुस्लिम समीकरण के लिहाज से वह बीजेपी उम्मीदवार राघव लखनपाल को सीधी टक्कर वो दे सकते हैं और मायावती ने सहारनपुर से हाजी फजुलर्रहमान को टिकट दिया है तो इससे मुकाबला त्रिकोणीय हो जाएगा. ये इसलिए भी है क्योंकि मोदी लहर में भी इमरान मसूद ने 2014 में चार लाख से अधिक वोट हासिल किए थे. इस चुनाव में उन्हें 64 हजार वोटों से हार मिली थी.

अमरोह

अमरोह में बसपा ने जेडीएस से आए दानिश अली को टिकट दिया है, बीजेपी उम्मीदवार कंवर सिंह तंवर यहां मैदान में हैं और सपा और आरएलडी के समर्थन से दानिश इस मुकाबले में मजबूत दिख रहे हैं, लेकिन कांग्रेस ने यहां पर वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी दिया है और इससे मुस्लिम वोट बंट जाएगा.

बीजेपी को कितना फायदा

कांग्रेस और सपा-बसपा के बीच दूरियां पहले से ज्यादा बढ़ने से बीजेपी को फायदा हो सकता है. चुंकि पहले चरण में पश्चिमी यूपी जाट बहुल्य क्षेत्र माना जाता है. और यहां दलित व मुस्लिम वोटर्स की भी बड़ी संख्या है.

इतना ही नहीं इस इलाके में राजपूत, अहीर, गूजर और मुसलमानों की भी अच्छी आबादी है. सभी दल ये चारते हैं कि वो इस समीकरण को बनाए रख सकें. बीजेपी ने यहां वैश्य और जाटों को प्राथमिकता दी है और विपक्ष को जोर दलित+मुस्लिम यूनिटी पर है. मौजूदा तस्वीर तो यही कहती है कि यहां पर समीकरण बीजेपी को फायदा पहुंचा सकता है.

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