लोकसभा चुनाव के लिए मायावती की क्या है प्लानिंग?…‘सोशल इंजीनियरिंग’ से करेंगी BJP का मुकाबला

मायावती ने 2007 में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के दम पर सरकार बनाई थी और एक बार फिर से वही रणनीति बना कर वो मैदान में उतर रही हैं. मायावती ब्राह्मण उम्मीदवारों पर दांव खेलने वाली हैं.

ब्राह्मणों को कितनी सीटें देंगी ?

‘ब्राह्मण शंख बजाएगा हाथी चलता जाएगा’, 2007 में बसपा ने ये नारा दिया था. मायावती ने ये चुनाव ब्राह्मण+ दलित+मुस्लिम को मिलाकत जीता था और एक बार फिर से वही सोशल इंजीनियरिंग मायावती कर रही हैं. मायावती नए गठबंधन में वहीं पुराना फॉर्मूला लागू करके चुनाव जीतना चाहती हैं. ब्राह्मण वोटों की भूमिका लोकसभा चुनाव में महत्वपूर्ण है क्योंक उनकी कुल आबादी में लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी है. बसपा को गठबंधन में 38 सीटें मिली. उम्मीद है कि मायावती करीब 25 फीसदी ब्राह्मणों को मैदान में उतारेंगी.

मायावती ने बनाए ब्राह्मण प्रभारी

मायावती ने अभी तक जितने भी प्रभारी बनाए हैं उनमें सबसे ज्यादा उम्मीदवार ब्राह्मण हैं. बसपा सुप्रीमो ने लोकसभा के 18 प्रभारी की सूची को अंतिम रूप दिया. इनमें से कई नामों का ऐलान पहले ही किया जा चुका है. आपको बसपा प्रभारियों की सूची दिखाते हैं.

बसपा के लोकसभा प्रभारियों में भदोही से पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्रा, सीतापुर से पूर्व मंत्री नकुल दुबे, आंबेडकर नगर से राकेश पाण्डेय, फतेहपुर सीकरी से पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय, कैसरगंज से संतोष तिवारी, घोसी से भूमिहार ब्राह्मण अजय राय, प्रतापगढ़ से अशोक तिवारी और खलीलाबाद से भीष्म शंकर तिवारी (कुशल तिवारी) के नाम तय हैं.

आपको बता दें कि जिन 8 ब्राह्मणों को शामिल किया गया है उनमें से 6 पूर्वी उत्तर प्रदेश के हैं जहां ब्राह्मण वोटर्स की संख्या काफी ज्यादा है. हालांकि अभी औपचारिक एलान नहीं हुआ है लेकिन साफ नजर आ रहा है कि मायावती सोशल इंजीनियरिंग पर फोकस कर रही हैं. इस बात की पूरी उम्मीद है कि आने वाले चुनाव में पूर्वी यूपी में बसपा ब्राह्मणों पर दांव खेलेगी. मायावती 2007 के वो आंकड़े देख रही हैं जिनमें उन्होंने सोशल इंजीनियरिंग के सहारे 403 विधानसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में 206 सीटों पर जीती थीं.

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