सपा-बसपा गठबंधन: शहरों में बीजेपी को टक्कर देने के लिए फॉर्मूला तय

बीजेपी शहरों में हमेशा मजबूत रही है. 2014 का लोकसभा चुनाव और 2017 का विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शहरों में मतदाताओं का भरपूर समर्थन हासिल किया था. लेकिन इस बार सपा-बसपा गठबंधन बीजेपी के समीकरण बिगाड़ सकता है. गठबंधन ने शहरों में बीजेपी को चुनौती देने के लिए बड़े शहरों की 14 में से 8 सीटों पर फॉर्मूला बना लिया है.

प्रदेश के 14 बड़े शहरों में सपा-बसपा गठबंधन कहां कहां चुनाव लड़ेगा ये तय हो गया है. सपा मुरादाबाद, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, झांसी, इलाहाबाद, गोरखपुर और वाराणसी सीटों पर लड़ सकती है. उपचुनाव में सपा ने बसपा के समर्थन से गोरखपुर और फूलपुर में बीजेपी को करारी शिकस्त दी थी. इसलिए आगामी चुनाव में सपा शहरी क्षेत्रों में बसपा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ सकती है.

यूपी में करीब 14 बड़ी शहरी सीटों में से 8 सीटों पर सपा और 6 सीटों पर बसपा चुनाव लड़ सकती है. ये इसलिए भी है क्योंकि इन 14 सीटों में से तीन पर 2014 में कांग्रेस दूसरे नंबर पर थी. इन तीनों सीटों पर सपा चुनाव लड़ सकती है. 2014 में कांग्रेस ने केवल अमेठी और रायबरेली की दो सीटें जीती थीं. सभी सीटें जहां कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही भाजपा ने जीतीं, बसपा तीसरे स्थान पर रही.

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सभी 14 शहरी सीटों पर चुनाव लड़ा था. बनारस लोकसभा सीट पर अभी पेंच फंसा हुआ है क्योंकि यहां पर आम आदमी पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी. सपा बसपा को एक लाख से भी कम वोट मिल थे. इस बार ऐसी संभावना है कि बनारस में विपक्ष संयुक्त उम्मीदवार उतार दे क्योंकि इससे बीजेपी को फायदा होगा.

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