2019: किन चुनावों पर है दुनिया की नज़र?

ये साल दुनिया के लिए एक चुनावी साल है. दुनिया के कई महत्वपूर्ण देशों के इस साल चुनाव होने. ये वो देश हैं जो दुनिया को प्रभावित करते हैं. इन देशों में होने वाले चुनावों के नतीजे बड़े पैमाने पर वैश्विक बिरादरी को प्रभावित करेंगे. एक नज़र डालते हैं उन देशों पर जहां इस साल चुनाव होने है.  

इजरायल

इस साल नौ अप्रैल को होने वाले चुनाव का नतीजा अगर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पक्ष में आता है तो वे रिकॉर्ड पांचवीं बार देश के पीएम होंगे. नेतन्याहू को अब तक की सबसे दक्षिणपंथी पीएम माना जाता है. बेंजामिन नेतन्याहू के शासन में सेना ने फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों के जो सलूक किया उसकी दुनिया ने आलोचना की है. बीते दो सालों में नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे हैं. जिनमे से तीन आरोपों को पुलिस ने सही पाया है. चुनाव पूर्व सर्वे में नेतन्याहू पिछड़ जरूर रहे है लेकिन उनकी पार्टी आगे है. इजराइल चुनाव फिलस्तीन, ईरान और सीरिया के लिए अहम हैं.

भारत

इस साल यहां भी आम चुनाव होंने हैं. 2014 में पीएम बने नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी परीक्षा होगी. वैसे तो पीएम मोदी ने अपनी छवि को बेहतर करने के लिए बहुत काम किए हैं और इसका फायदा भी उन्हें हुआ है लेकिन बीते दिसंबर में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पार्टी की हार हुई. बेरोजगारी, महंगाई, गाय और हिंदू राष्ट्रवाद के मुद्दे को लेकर कांग्रेस आगे बढ़ रही है. क्षत्रप साथ आ रहे हैं और मौजूदा सरकार के लिए बड़ी चुनौती रहने वाली है.

यूरोपीय संसद

इसी साल मई में यूरोपीय संसद का चुनाव होगा. इस चुनाव में 28 देश शामिल होते हैं. इस बार इसलिए इन चुनावों की चर्चा है क्योंकि 22 देशों के लोग अपने यहां प्रवासियों की संख्या बढ़ने से परेशान हैं और इसके लिए वे ईयू को जिम्मेदार मानते हैं. कई देशों में दक्षिणपंथी पार्टियां काफी ताकतवर हो चुकी हैं. लिहाजा इस बार ईयू विरोधी मतदान होने की संभावना बन रही है.

नाइजीरिया

अफ़्रीकी देश नाइजीरिया में फरवरी में चुनाव होगा. राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी ने पिछले दिनों जनता को राहत देने वाली कई योजनाएं शुरू की हैं. लेकिन वो वापस आएंगे ये कहना मुश्किल है. उनके कार्यकाल में देश के आर्थिक हालात बदतर हो गए हैं. देश में आतंकी संगठन बोको हराम की ताकत बढ़ी है. यही कारण है कि चुनाव से पहले सोशल मीडिया में मुहम्मदु बुहारी के खिलाफ कैंपेनिंग हो रही है.

यूक्रेन

यूक्रेन में इस साल मार्च में राष्ट्रपति चुनाव होगा. ये चुनाव यूक्रेन, रूस, अमेरिका और यूरोप के लिए भी महत्वपूर्ण है. 2014 में क्रीमिया पर रूस के कब्जे के बाद, क्या अभी भी यूक्रेन के लोग रूस से तनातनी जारी रखना चाहते हैं इन चुनावों से साफ हो जाएगा. क्योंकि रूस से संबंध खराब होने से यूक्रेन को ही नुकसान हुआ है. यूक्रेन के प्रमुख बंदरगाहों पर रूसी नाकाबंदी के चलते उसे लगातार आर्थिक नुकसान हो रहा है. लोग मौजूदा सरकार से काफी परेशान हैं.

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