विज्ञान कांग्रेस में जब ‘विज्ञान’ मुंह ताकता रह गया !

साभार: पीटीआई

जालंधर: भारतीय विज्ञान कांग्रेस में पहुंची विज्ञान जहत की तमाम हस्तियों ने अपना संबोधन दिया. लेकिन इस कार्यक्रम में सबसे ज्यादा जिसका संबोधन सुर्खियों में है वो हैं आंध्र यूनिवर्सिटी के कुलपति जी. नागेश्वर राव. उन्होंने कहा है कि भारत में विज्ञान हमेशा ऊपर रहा है. त्रेता और सतयुग में भी हाईटेक साइंस मौजूद थी.

फोटो यूनिवर्सिटी की वेबसाइट से ली गई है

आंध्र यूनिवर्सिटी के कुलपति जी. नागेश्वर राव ने दावा किया है महाभारत के कौरवों का जन्म स्टेम सेल और टेस्ट ट्यूब की तकनीक से हुआ था. एक महिला 100 बच्चों को जन्म नहीं दे सकती इसीलिए महाभारत के अनुसार 100 अंडों को 100 घड़ों में रखा गया था, यानी कौरव टेस्टट्यूब बेबी थे. राव के मुताबिक

जैसा कि चार्ल्स डार्विन ने कहा है कि जीवन पानी से शुरू हुआ, ठीक वैसे ही अगर भारतीय सभ्यता के इतिहास पर गौर किया जाए तो भगवान विष्णु का पहला अवतार भी एक मछली (मत्स्य) था. दूसरे अवतार के लिए उन्होंने एक कछुए (कूर्म) एक उभयचर जानवर का आकार लिया. तीसरा अवतार एक सुअर के सिर और एक मानव शरीर (वराह) था. चौथा शेर व मानव शरीर के सिर के साथ नरसिंह अवतार था. उन्होंने पांचवें अवतार में वामन के मानव रूप धारण किया.

राव यहीं नहीं रूके उन्होंने कहा कि रामायण में गजब की तकनीक विकसित की जा चुकी थी. और उस समय रावण के पास केवल एक पुष्पक विमान ही नहीं बल्कि 24 तरह के विमान थे, जो अलग-अलग आकार और क्षमताओं के थे.

राव ने तो यहां तक दिया कि रावण ने हवाई अड्डे बनवाए थे जिसपर वो विमान उतार सके. गाइडेड मिसाइल का जिक्र करते हुए राव ने कहा कि राम के पास उस वक्त ऐसी मिसाइल थी जो लक्ष्यों का पीछा करती और उसे भेदने के बाद वापस आते थी.’ कुलपति जी. नागेश्वर राव ने पंजाब के जालंधर में आयोजित ‘साइंस कांग्रेस’ के कार्यक्रम में ये बातें कहीं.

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