पीएम मोदी ने रामभक्तों को जोर का झटका धीरे से दिया

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2019 की आरंभ हुआ और सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर मामले की सुनवाई शुरू होने से पहले मोदी ने झटके वाला बयान दिया. जो रामभक्त इस आस में बैठे थे कि मोदी राम मंदिर निर्माण के लिए कोई बड़ा कदम उठाने वाले हैं वो जरा ध्यान दें क्योंकि मोदी जी ने जोर का झटका धीरे से दिया है.
29 अक्टूबर 2018 से वीएचपी, संघ और तमाम हिंदूवादी संगठन सरकार से मांग कर रहे थे कि राम मंदिर का निर्माण अध्यादेश लाकर कराया जाए.

साधु संतों ने भी धर्मसंसद में प्रस्ताव पास किया और राष्ट्रपति से मुलाकात करके जल्द-जल्द मंदिर निर्माण का रास्त निकालने की मांग की थी. रामभक्तों को उम्मीद थी कि मोदी न्यायिक प्रक्रिया से बाहर जाकर कोई रास्ता निकालेंगे लेकिन समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में मोदी ने साफ कर दिया है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर तब तक अध्यादेश नहीं लाया जा सकता जब तक ये मामला कोर्ट में है. उन्होंने कहा है

यह मुद्दा देश की शीर्ष अदालत में लंबित है इसलिए उनके नेतृत्व वाली सरकार इस पर कोई अध्यादेश नहीं लाएगी. अध्यादेश पर कोई विचार सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद किया जाएगा.

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

ये बयान उन करोड़ो हिंदुओं के लिए झटका सरीखा है जो ये उम्मीद पाले बैठे थे कि सुप्रीम कोर्ट से बाहर भी मंदिर निर्माण का कोई रास्ता निकल सकता है. दरअसल पिछले कुछ दिनों से लोग ये मांग कर रहे थे कि जब मोदी तीन तलाक और एससी एसटी पर अध्यादेश ला सकते हैं तो फिर राम मंदिर पर क्यों नहीं. इस सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा है कि तीन तलाक पर अध्यादेश कोर्ट के फैसले के बाद आया था. मोदी ने इस दौरान ये भी कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में अगर महागठबंधन हुआ तो 180 सीटों से ज्यादा नहीं जीत पाएगा.

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