सर्दियों में कोई बड़ा फैसला लें या टाल दें ?

मौसम का आपके मन पर बहुत असर पड़ता है. मौसम सुहाना हो तो मन बाग-बाग रहता है. सर्दी, गर्मी, बसंत, बारसात, हर मौसम का मजा अलग है. लेकिन मौसम का कोई बड़ा फैसला लेने से कोई रिश्ता है क्या. अब देखिए न, फिल्मों में कितने ही गाने बने हैं मौसम को लेकर

आज मौसम बड़ा बेईमान है,
मौसम मस्ताना, आशिक दीवाना,

वगैरह वगैरह, तो यहां सवाल ये है कि मौसम कि हमारे जीवन में जब इतनी अहमियत है तो क्या इसका असर कोई बड़ा फैसला लेने पर भी पड़ता है? क्या ऐसा भी होता है कि गर्मियों में फलां फैसला लें. बरसात में ये फैसला लें, या सर्दियों में ये फैसला न लें. ऐसा होता है क्या. चुंकि इन दिनों सर्दियां चल रही हैं इसलिए आपके लिए ये जानना जरूरी है. क्या आप नहीं चाहेंगे कि आप अपनी जिंदगी, शादी, या नौकरी या फिर ब्रेकअप से जुड़ा हुआ कोई बड़ा फैसला कर रहे हों और आप ये तय न कर पा रहे हों कि क्या करना है ? क्या नहीं करना है ? तो आप मौसम बदलने का इंतजार करिए, शायद कुछ अच्छा हो जाए. चाहेंगे न

तो अहम बात ये है कि कोई फैसला कब लिया जाए ? क्या उसके लिए मौसम बदलने का इंतजार किया जाए ये महत्वपूर्ण बात है. अच्छा, आपने SAD के बारे में सुना है. नहीं सुना, तो चलिए हम बताते हैं. SAD का मतलब होता है “सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर” ये एक बीमारी है जो सर्दियों में होती है. अमेरिका में इस बीमारी से करीब 10 प्रतिशत लोग पीड़ित हैं. इस बीमारी में आप थोड़े परेशान रहते हैं. तनाव रहता है और बेचैनी महसूस होती है. एक शोध कहती है कि अस्सी के दशक में सर्दियों के मौसम में इस बीमारी से अमेरिका में करीब 92 प्रतिशत लोग प्रभावित थे.
अब सवाल ये है कि मौसम सर्दियों का है और आप तनाव में है. ऐसे में सर्दियों में कोई बड़ा फैसला लेना चाहिए या इसे गर्मियों के लिए टाल देना चाहिए. क्या जब आप खिंचे खिंचे हैं तो आपको कोई बड़ा फैसला लेना चाहिए. इसको आप ऐसे समझ सकते हैं कि आप तनाव में होते हैं तो आपको भविष्य की आशंका घेरे रहती हैं ऐसे में जब आप कोई फैसला करते हैं तो आप पूरी तरह से उसे परख लेते हैं. शोध कहती है कि सर्दियों में जो लोग SAD से शिकार हैं वो आर्थिक मामलों से जुड़े फैसलों को सही ढँग से लेने में सक्षम होते हैं.

किस मौसम में कौन सा फैसला करें?

अगर किसी में नुकसान की ज्यादा संभावना है और अगर आपको उस काम में फेल होने पर भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है ऐसे हालात में आपको सर्दियों में फैसला लेना चाहिए. अगर कोई फैसला ऐसा है जिसको लेकर आप किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे हैं तो आप गर्मियों का इंतजार करें. गर्मियों में आप ऐसे हालात में होंगे जब आप आसानी से नतीजे पर पहुंच पाएंगे.

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