कोरोनावायरस का इलाज करने से पहले इन बातों का ख्याल रखें…नहीं तो होगी मुश्किल Treatment of Coronavirus

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कोरोनावायरस का इलाज (coronavirus ka ilaj) है लेकिन आपको खुद ही डॉक्टर नहीं बनना है. अगर आपको कोरोना के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो डॉक्टर से परामर्श लें उसके बाद ही इसका इलाज शुरू करें.

लोग डरे हुए हैं और भारत में कोरोनावायरस का इलाज हर आदमी अपनी तरह से कर रहा है. यह भी एक बड़ा कारण है कि लोग अपनी जान गंवा रहे हैं. हालिया आंकड़े बताते हैं कि कोरोनावायरस का इलाज करने के लिए जरूरी है कि आप किसी जानकार डॉक्टर से परामर्श जरूर लें. अगर आप अपने मन से इलाज शुरू करते हैं तो यह आपकी जान पर भारी पड़ सकता है.

कोरोनावायरस का इलाज और होम आइसोलेशन

होम आइसोलेशन या क्वॉरेंटाइन कोरोनावायरस #coronavirus को हराने के लिए बहुत जरूरी हैं. कोविड-19 लाइलाज नहीं है लेकिन अगर आप इसके इलाज में कोताही बरतते हैं तो फिर यह जानलेवा हो जाती है. इसलिए जब आप होम आइसोलेशन में हों तो अपनी दिनचर्या को संयमित रखें, नियमित योग करें और खानपान पर विशेष ध्यान दें. इसके साथ ही सबसे जरूरी बात यह है कि आप डॉक्टर की सलाह लेते रहे और अपनी तबीयत के बारे में डॉक्टर से बात करते रहें. होम आइसोलेशन के दौरान आप फेफड़ों से जुड़ी हुई कुछ एक्सरसाइज भी कर सकते हैं. जैसे 40 सेकंड तक सांस रोक ना और गुब्बारा फुलाना.

कोरोनावायरस का इलाज और दवाइयां

इस वक्त कोरोनावायरस का इलाज करने के लिए बाजार में कई दवाइयां प्रिसक्राइब की जा रही हैं. जिनमें ivermectin, Azithromycin, vitamin c, zinc, vitamin d, paracetamol जैसी दवाइयां शामिल हैं. अलग-अलग डॉक्टर अपनी जानकारी के हिसाब से अलग-अलग मरीजों को दवाइयां प्रिसक्राइब कर रहे हैं. इसलिए यह जरूरी है कि कोरोना वायरस के लक्षण दिखाई देने के बाद आप डॉक्टर से जरूरी सलाह लें और उसके बाद ही इलाज और दवाइयां शुरू करें.

अस्पतालों में कैसे होगा कोरोना का इलाज?

यह एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल है क्योंकि भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 4.01 लाख नए मामले दर्ज किए गए हैं और 4,187 लोगों की मौत हुई है. इसके साथ ही एक दिन में चार हज़ार से ज़्यादा मौत के मामले में भारत ब्राज़ील और अमेरिका के बाद ती़सरा देश बन गया है. 14 फ़रवरी के बाद से भारत में कुल 82 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान कोरोना से गई है. अब सभी के लिए यह जानना जरूरी है कि अगर संक्रमित बढे तो अस्पतालों में कोरोनावायरस का इलाज कैसे होगा? हाल के दिनों में शहरों में कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़े हैं जिसके कारण वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद तनाव से गुज़र रही है. लेकिन अब कोरोना वायरस तेज़ी से गांवों में भी पैर पसार रहा है जहां शहरों की अपेक्षा स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पहले से ही बदहाल है.

कोरोना के इलाज करने के लिए गांव कितने तैयार?

2019 में सरकार द्वारा जारी की गई नेशनल हेल्थ प्रोफ़ाइल रिपोर्ट के अनुसार जहां शहरी इलाक़ों में प्रत्येक दस लाख की आबादी पर सरकारी अस्पताल में 1,190 बेड की सुविधा है, वहीं ग्रामीण इलाक़ों में प्रत्येक दस लाख की आबादी पर सरकारी अस्पताल में 318 बेड की सुविधा है. राजधानी दिल्ली जहां अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीज़ों के लिए बेड की कमी की ख़बरें आई थीं, वहां प्रत्येक दस लाख की आबादी पर सरकारी अस्पताल में 1,452 बेड हैं. ग्रामीण इलाक़ों में स्वास्थ्य सेवा की बदहाल हालत इस बात का संकेत है कि संक्रमितों की संख्या अधिक होने पर यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पर तनाव भी कहीं अधिक होगा.

कोरोनावायरस का इलाज संभव है लेकिन उसके लिए हमें कई मोर्चों पर जंग लड़नी होगी. सिर्फ हमें ही नहीं हमारी सरकार को भी ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुधारना होगा. नहीं तो आने वाला समय और ज्यादा मुश्किलें लेकर आएगा.

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