#PanchayatOnline: पिछले 5 सालों में पंचायतों के विकास के लिए दो लाख करोड़ रुपए खर्च हुए, लेकिन क्या विकास हुआ?

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ग्रामीण विकास या यूं कहें कि गांववालों और पंचायतों का कायाकल्प करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मोटा पैसा खर्च करती हैं. लंबी चौड़ी योजनाएं बनाई जाती हैं. योजनाओं में भारी भरकम बजट झोंका जाता है. लेकिन विड़वना ये है कि बजट और योजनाएं गांव के विकास में बुनियादी बदलाव भी नहीं ला पाती हैं. लेकिन अब पंचायती राज मंत्रालय ने कहा है कि वो 2026 तक पंचायतों सशक्त करने के लिए बजट को पांच गुना बढ़ाएगा. और करीब 10 लाख करोड़ रुपये पंचायतों पर खर्च करेगा.

दस लाख करोड़, जीहां यही वो नंबर है जो पंचायती राज मंत्रालय ने दिया है. लब्बोलुआब ये है कि 2026 तक पंचायतों के उत्थान और मौजूदा समस्याओं के समाधान के लिए मंत्रालय 2026 तक 10 लाख करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है. ये आज के बजट से करीब पांच गुना ज्यादा है. ये बात गुरुवार को आयोजित हुई 15वीं फाइनेंशियल कमीशन यानी वित्त आयोग की बैठक में कही गई. 2020-2021 से 2025-2026 के लिए आयोग ने 10 लाख करोड़ आवंटित किए हैं. आपको बता दें कि 14वें फाइनेंस कमीशन में 2 लाख करोड़ रुपये दिए गए थे. यानी अभी जो बजट आवंटित किया गया है वो पिछले का पांच गुना ज्यादा है.

मंत्रालय ने इस बैठक में एक इम्पैक्ट इवॉल्यूशन रिपोर्ट भी पेश की जिसके मुताबिक पेश की. जिसके मुताबिक 2015-19 के बीच एफसी ग्रांट दिया गया उसमें से 78 फीसदी ग्रांट का इस्तेमाल कर लिया गया है. यानी जो पैसा पंचायती राज विभागों को केंद्र सरकार ने दिया उसमें से 78 फीसदी पैसा जमीन पर खर्च किया गया. नई सड़कों का निर्माण और पुरानी सड़कों की मरम्मत, पंचायतों में पेयजल की उपलब्धता के लिए इस ग्रांट के बड़े हिस्से का खर्च किया गया. इस बैठक में ये भी बताया है कि देश की 2 लाख 63 हजार पंचायतों में विकास के कई काम प्रगति पर हैं.

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि कोरोना काल में पंचायत एक महत्वपूर्ण नोडल प्वाइंट की रुप में सामने आई है. पंचायतों में करीब 38 हजार क्वारेंटाइन सेंटर, आइसोलेशन बार्ड, ट्रेसिंग प्वाइंट संचालित हो रहे हैं. भविष्य में सभी पंचयातों में कम्यूनिटी किचन बनाने की योजना है जो स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित की जाएगी. पहली नजर में आप इस बैठक के मुख्य बिंदुओं पर गौर करें तो आपको लगेगा कि वाकई में विकास मीलों आगे दौड़ रहा है. लेकिन इसमें आधी हकीकत आधा फसाना है. फाइनेंशियल कमीशन के 10 लाख करोड़ के एलोगेशन पर पंचायत पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों की की राय जुदा है.

फर्रुखाबाद जिले में राजेपुर ब्लॉक के ब्लॉक प्रमुख सुबोध यादव बताते हैं, ‘ भयंकर लूट का खेल चल रहा है. 10 लाख करोड़ के बजट का गुणगान करने से पहले सरकार ये भी तो बताए कि 14वीं वित्त आयोग में जो 2 लाख करोड़ खर्च किए वो कहां किए हैं? धरातल पर कुछ नहीं है. ये 10 लाख करोड़ खर्च करने की बात कर रहे हैं लेकिन ये पैसा लाएंगे कहां जब इनके पास वेतन देने के लाले पड़े हुए हैं. ये पेट्रोल डीजल से पैसे बनाने में तुले हुए हैं.’

सुबोध यादव लॉकडाउन और पंचायतों की दुर्दशा को लेकर चिंतित हैं. वो कहते हैं कि ‘केंद्र सरकार ने जो लॉकडाउन किया उसके चलते देश में तबाही आने वाली है. गरीबों की कोई सुनने वाला नहीं है लोग भुखमरी से मर रहे हैं. इस सरकार से ज्यादा भ्रष्टाचार कभी कहीं हुआ ही नहीं है. अगर ये लोग पंचायतों पर 10 लाख करोड़ खर्च करने का दावा करते हैं तो वो झूठा और भ्रामक है. जो लोग शहर से गांव में लौटकर आए हैं वो बेरोजगार हो गए हैं. सरकार बताए कि इनके लिए उसके पास क्या योजना है. जो ‘गरीब कल्याण रोजगार योजना’ शुरु की उसका फायदा यूपी को मिल नहीं रहा है’

पंचायती राज मंत्रालय का कहना है कि 14वें वित्त में उसने 2 लाख करोड़ दिए और 78 फीसदी पैसे का इस्तेमाल हुआ लेकिन सुबोध यादव इससे इत्तेफाक नहीं रखते. वो कहते हैं कि ‘पहले तो मैं आपको बता दूं कि जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख अधिकारविहीन हो गए हैं. दूसरी बात जो मैं आपको बताना चाहता हूं वो ये है कि 14वें वित्त का सारा पैसा ग्राम पंचायतों को दे दिया गया. पंचायतों में इस पैसा का बंदरबांट हुआ और धरातल पर ‘ढाक तीन पात’ वाली स्थिति हो गई. 14वें वित्त आयोग में ऐसी लूट हुई है कि अगर जांच करा ली जाए तो अगर सरकार ने 2 लाख करोड़ रुपया दिया है तो उसमें 1 लाख 20 हजार करोड़ लूट हुई है.’ वो कहते हैं कि 14वें वित्त का ब्लॉक और जिला पंचायत में एक रुपया नहीं आया’ अब ये सुनने में आ रहा है कि 15वें वित्त का कुछ पैसा ब्लॉक और जिला पंचायतों में आएगा.’

पंचायती राज विभाग के डिप्टी डायरेक्टर (राज्य एवं चौदहवां वित्त) आर.एस चौधरी कहते हैं कि ये बात सही है कि 14वित्त का पूरा पैसा ग्राम पंचायतों और प्रधानों को चला गया था. ये इसलिए हुआ क्योंकि अधिकांश काम ग्राम पंचायतों में ही करने थे. लेकिन 15वें वित्त आयोग ने कुछ बदलाव किए हैं. अबकी बार जो पैसा आया है इसमें 15-15 प्रतिशत क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत को भी बजट दिया गया है और ग्राम पंचायत के बजट को घटाकर 70 फीसदी कर दिया गया है. अब क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत का रिसोर्स बढ़ेगा. इससे बड़े काम हो पाएंगे. जैसे एक विकास खंड से दूसरे विकास खंड को जोड़ने का काम जिला पंचायत कर लेगी. और अब अगर क्षेत्र पंचायत चाहेगी तो एक ग्राम पंचायतों को जोड़ने वाला काम कर लेगी.’

ग्रामीण विकास और पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए बड़े पैमाने पर बजट खर्ज किया जाता है. लेकिन भ्रष्टाचार और पंचायत से जुड़े लोगों में विजन की कमी के चलते बजट का बंदरबांट होता है. ऐसे में ये जरूरी है कि 15वित्त का बजट वहीं पर खर्च हो जहां उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है. और इसके लिए जनभागीदारी और पंचायत से जुड़े प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की भूमिका अहम होगी.

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