महाराष्ट्र में क्या है सत्ता तक पहुंचने का समीकरण?

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आए 15 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन अभी तक सरकार का गठन नहीं हो पाया है . राज्य के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सबसे बड़े दल भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने के लिए न्योता भेजा है. चुंकी बहुमत का आंकड़ा किसी भी दल के पास नहीं है इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण है बीजेपी बहुमत कैसे साबित करती है.

बीजेपी के बाद सरकार बनाने के लिए 4 समीकरण

1- BJP अल्पमत की सरकार बनाए

बीजेपी के पास सरकार बनाने का पहला समीकरण तो यह है कि अगर वह 29 निर्दलीय विधायकों को अपने साथ कर लेती है तो उसके पास 134 विधायकों का संख्या बल हो जाता है. ऐसे में बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उसे 11 विधायकों की जरूरत होगी. ऐसी स्थिति में फ्लोर टेस्ट के वक्त विधानसभा से दूसरी पार्टियों के 21 विधायक अनुपस्थित रहें तो भाजपा सदन में बहुमत साबित कर लेगी. 21 विधायकों की अनुपस्थिति की स्थिति में सदन की सदस्य संख्या 267 हो जाएगी और बहुमत का जरूरी आंकड़ा 134 का हो जाएगा. ये आंकड़ा भाजपा 29 निर्दलियों की मदद से जुटा सकती है. बीजेपी इस तरह से सरकार बना भी सकती है क्योंकि कर्नाटक में इसी तरीके से उसने सरकार का गठन किया. हालांकि, वहां पर विधायकों ने इस्तीफे दिए थे. महाराष्ट्र में नई विधानसभा बनी है और ऐसी स्थिति में विधायकों के इस्तीफे की संभावना कम है.

2- BJP सदन में ध्वनिमत से बहुमत साबित करे

बीजेपी के लिए सत्ता तक पहुंचने का दूसरा समीकरण यह है की 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 105 विधायक हैं. बहुमत के लिए 145 का आंकड़ा जरूरी है. अगर भाजपा 29 निर्दलीय विधायकों को अपने साथ कर लेती है, तो उसका संख्या बल 134 का हो जाता है. बहुमत परीक्षण के दौरान ध्वनिमत से भाजपा अपना बहुमत साबित कर सकती है. 2014 में भी देवेंद्र फडणवीस सरकार ने ध्वनिमत से ही बहुमत साबित किया था. बहुमत परीक्षण के समय तक भाजपा और शिवसेना साथ नहीं थे. सत्ता गठन के कुछ समय बाद दोनों दलों का गठबंधन हो गया था.

3- शिवसेना के 45 विधायक भाजपा के साथ आ जाएं

तीसरा समीकरण यह है जो मुश्किल जरूर है लेकिन बीजेपी को लगता है कि ऐसा हो सकता है. क्योंकि भाजपा सांसद संजय काकड़े ने दावा किया था कि शिवसेना के 45 विधायक उनकी पार्टी को समर्थन देना चाहते हैं. ऐसे में 56 विधायकों वाली शिवसेना से 45 विधायक टूटते हैं तो यह संख्या दो-तिहाई से ज्यादा हो जाएगी और दल-बदल कानून लागू नहीं होगा. 105 विधायकों वाली भाजपा का संख्या बल इन विधायकों की मदद से 150 पहुंच जाएगा और वह सदन में बहुमत साबित कर देगी. लेकिन शिवसेना ने इसी समीकरण की आशंका के चलते अपने सभी विधायकों को
रिजॉर्ट में रोक रखा है.

4 -भाजपा-शिवसेना में गतिरोध खत्म हो

चौथा और आखिरी समीकरण सरकार बनाने का यह है की भाजपा-शिवसेना के बीच गतिरोध दूर हो जाए इस स्थिति में भाजपा (105) और शिवसेना (56) मिलकर आसानी से बहुमत के 145 के आंकड़े को पार कर लेंगे. लेकिन ऐसा होता फिलहाल नजर नहीं आ रहा है शिवसेना के तेवर तल्ख हैं और बीजेपी भी 50-50 के फार्मूले पर राजी नहीं हो रही

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