क्या सरकार से अर्थव्यवस्था संभल नहीं रही है ?

दोबारा सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो अर्थव्यवस्था को रसातल में जाने से बचाएं. भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की बनाने का एलान करने के बाद खबर ये है कि भारत इस मोर्चे पर दो स्थान और नीचे चला गया है.

जब केंद्र सरकार के तमाम मंत्री, वित्त मंत्री के साथ प्रधानमंत्री खुद जब ये दावा कर रहे हैं कि 2025 तक भारत की अर्थव्यवस्था पांच ट्रिलियन डॉलर यानी पांच लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी तब आर्थिक मोर्चे पर भारत लागातार कमजोर हो रहा है. विश्व बैंक के ताजा आंकड़ें बताते हैं कि 2018 में भारत अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर टॉप फाइव में शामिल था लेकिन अब उसने ये दर्जा खो दिया है. एक बार फिर ब्रिटेन और फ्रांस उससे आगे हो गए हैं.

इन आंकड़ों के मुताबिक 2018 में भारत 2.73 ट्रिलियन डॉलर के साथ दुनिया की सातवीं बड़ी अर्थव्यवस्था रहा. 2017 में जो आकंड़े सामने आए थे उसमें भारत ने फ्रांस को पछाड़ कर पांचवां स्थान हासिल किया था. 2017 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 2.65 ट्रिलियन डॉलर का था और उसके बाद 2.64 ट्रिलियन के साथ ब्रिटेन छठवें और 2.59 ट्रिलियन डॉलर के साथ फ्रांस सातवें स्थान पर था. लेकिन अब ये दर्जा भारत से छिन गया है.

विश्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था बढ़कर 2.82 ट्रिलियन डॉलर और फ्रांस की अर्थव्यवस्था 2.78 ट्रिलियन डॉलर हो गई है. वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 2.73 ट्रिलियन डॉलर पर रुक गया है. इस हिसाब से भारत की भारत की अर्थव्यवस्था में महज 3.01 फीसदी की ही बढ़ोत्तरी हुई. ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में 6.81 और फ्रांस की अर्थव्यवस्था में 7.33 फीसदी का बढ़ोत्तरी हुई है.

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