ओबीसी कोटे को तीन वर्गों में बांटने की तैयारी !

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आरक्षण को लेकर सियासत गर्माई हुई है. ओबीसी आरक्षण को तीन वर्गों में बांटने की कोशिशें चल रही हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र की मोदी सरकार अपने एक प्रमुख पैनल की सिफारिश पर जो 27 फीसदी आरक्षण ओबीसी को दिया जाता है उसको तीन वर्गों में बांट सकती है. यानी सरकार ओबीसी आरक्षण का उप-वर्गीकरण कर सकती है.

ओबीसी आरक्षण को तीन श्रेणियों में बांटने की कवायद चल रही है. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक केंद्र सरकार का एक प्रमुख पैनल 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को तीन श्रेणियों में बांटने की वकालत कर रहा है. ये पैनल 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण में बदलाव करने की सिफारिश कर सकता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने यह जानकारी दी है. इसर रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इन सिफारिशों को केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय मान लेता है तो देश के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है.

आरक्षण संबंधित पैनल ने ओबीसी आरक्षण के तहत अन्य पिछड़ा वर्गों को तीन उप-वर्गों में बांटने का प्रस्ताव दिया है. ये वर्गीकरण इस आधार पर किया जाएगा कि सभी वर्गों को कितना फायदा आरक्षण का मिल रहा है. यहां आपको ये भी जान लेना चाहिए कि खबर के मुताबिक नई मोदी सरकार अपने 100 दिन के एजेंडे के तहत इस प्रस्ताव को लागू करने का फैसला ले सकती है. अगर सरकार ने इस पर फैसला लिया तो फिर ओबीसी आरक्षण तीन हिस्सों में बंट जाएगा.

ओबीसी आरक्षण के बारे में अहम बात

इस वक्त देश में ओबीसी कोटे के तहत 2 हजार 633 जातियां हैं. जो पैनल ओबीसी आरक्षण को तीन श्रेणियों में बांटने की बात कह रहा है उसने सिफारिश की है कि इन जातियों में जिन्हें आरक्षण का लाभ बिलकुल नहीं मिला है, उनके लिए दस प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए. पैनल ने कहा है कि जिन्हें ओबीसी आरक्षण का थोड़ा फायदा हुआ है उन्हें भी 10 फीसदी आरक्षण दिया जाना चाहिए और जिन्हें आरक्षण का सबसे ज्यादा फायदा हुआ है उन्हें सात फीसदी कोटे के तहत लाया जाना चाहिए.

इस पैनल ने कहा है कि केवल दस उप जातियां ऐसी हैं जिन्हें 25 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का फायदा दिया गया है. वहीं 983 उप-जातियां ऐसी हैं जिन्हें न के बराबर आरक्षण का फायदा मिला. पैनल के मुताबिक इस असमानता को खत्म करने की जरूरत है. आरक्षण संबंधित रिपोर्ट तैयार कर रहे पैनल की अध्यक्ष पूर्व हाई कोर्ट जज जी रोहिणी ने कहा कि 31 जुलाई तक रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी जाएगी. इस मामले में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद जातियों के उप वर्गीकरण के बारे में देखेंगे.

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