मध्यप्रदेश : बीजेपी के ‘प्रज्ञा’ प्रयोग के लिए कांग्रेस की ‘न्याय’ प्रतिज्ञा

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मध्यप्रदेश एक ऐसा सूबा है जहां पर बीजेपी 15 बरस तक सत्ता में रही है…बीजेपी का संगठन यहां काफी मजबूत है और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे का मुकाबला हुआ है…इस बार बीजेपी ने इस राज्य को हिन्दुत्व की प्रयोगशाला बनाने की कोशिश की है.

बीजेपी ने भोपाल में प्रज्ञा ठाकुर सिंह को मैदान में उतारकर मध्यप्रदेश के चुनावी समर को दिलचस्प बना दिया है…ये लोकसभा सीट बीजेपी की मजबूत सीट मानी जाती है लेकिन कांग्रेस ने यहां से अपना सबसे मजबूत उम्मीदवार दिया है…बीजेपी जानती है कि मध्यप्रदेश की राजनीति में दिग्जिवय सिंह के घाघ नेता है और वो भोपाल की सियासत को भी बारीकी से समझते हैं…बीजेपी भी जानती है कि इस बार अगर उसे मध्यप्रदेश में 2014 का प्रदर्शन दोहराना है तो वो करना होगा जिसके लिए वो जानी जाती है…प्रज्ञा को भोपाल से उतार कर भाजपा वोटों के ध्रुवीकरण की ओर ध्यान दे रही है और इसका असर पूरी हिंदी बेल्ट पर होगा ये बीजेपी को उम्मीद है…कांग्रेस के दिग्गज और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से मुकाबले के लिए भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा सिंह को भोपाल से उम्मीदवार बनाकर चुनावी बहस को नया मोड़ दे दिया है…चुंकि मध्यप्रदेश भाजपा और संघ का गढ़ है..पिछले चुनाव में 29 में से 27 सीटें भाजपा ने जीती थीं…

  • मध्यप्रदेश में चार चरण में मतदान होगा
  • 29 अप्रैल को पहले चरण में 6 सीटों पर वोटिंग
  • सीधी, शहडोल, जबलपुर, मंडला, बालाघाट और छिंदवाड़ा में वोटिंग

पहले चरण में मंडला और बालाघाट में बीजेपी और छिंदवाड़ा में कांग्रेस मजबूत है…सीधी, जबलपुर और शहडोल में लड़ाई कांटे की है…आंकड़े बदले हैं क्योंकि 2014 के चुनाव में बीजेपी ने 27 सीटें जीती थीं, लेकिन विधानसभा चुनाव में उसे केवल 17 पर ही बढ़त हासिल थी….मध्यप्रदेश में बीजेपी का प्रचार थोड़ा बिखरा है क्योंकि कांग्रेस के कर्जमाफी और न्याय योजना का बीजेपी के पास पुख्ता जवाब नहीं है…दूसरा कांग्रेस से जुड़े लोगों पर आयकर छापों का मुद्दा भी चलता नहीं दिख रहा है…यही कारण है कि बीजेपी ने प्रज्ञा का प्रयोग किया है…प्रज्ञा उम्मीद की किरण हैं बीजेपी के लिए…मगर क्या दिग्विजय के सामने ये प्रयोग सफल होगा इसको लेकर सवाल है…दिग्विजय को भाजपा की परंपरागत सीट भोपाल से उतारकर कांग्रेस ने जोखिम लिया है और इसका फायदा पार्टी पूरे प्रदेश में लेने की कोशिश में है…बीजेपी की कोशिश है कि वो प्रज्ञा के जरिए पूरी हिंदी बेल्ट में हिंदू वोटरों को प्रज्ञा के जरिए लुभाए…आप ये मानकर चलिए कि प्रज्ञा के चलते भोपाल सीट पर चुनाव वाराणसी, अमेठी जैसा रोचक हो गया है…

कांग्रेस कर रही है न्यायऔर कर्जमाफी की बात

वीओ- कांग्रेस को मध्य प्रदेश ये भरोसा है कि न्याय और कर्जमाफी उसे चुनावी वैतरणी पार करा देंगे इसलिए कांग्रेस के नेता इन्हीं दो मुद्दों की बात कर रहे हैं…भोपाल में दिग्विजय सिंह, जबलपुर में विवेक तन्खा, सीधी से अजय सिंह, गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया, खंडवा से अरुण यादव, झाबुआ से कांतिलाल भूरिया और छिंदवाड़ा से मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ मजबूत उम्मीदवार दिखाई देते हैं…कांग्रेस को ये उम्मीद है कि वो इन साटों पर जीतेगी.

इंदौर में बीजेपी के शंकर ललवानी और कांग्रेस के पंकज संघवी में मुकाबला

सुमित्रा महाजन की जगह शंकर ललवानी को लड़ना क्या रणनीतिक चूक है ये कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि कांग्रेस के पंकज संघवी भी विधानसभा से लेकर लोकसभा तक हार चुके हैं…हालांकि इंदौर लोकसभा सीट पर ग्रामीण इलाकों की चार में तीन सीटें कांग्रेस के पास हैं इसलिए उसे जीत की उम्मीद है…वहीं बीजेपी को इंदौर शहर की 5 सीटों पर जीत की उम्मीद है….यहां आपको ये भी बता दें कि बीजेपी मध्यप्रदेश में प्रदेश में नेतृत्व के संकट से गुजर रही है और चुनाव का जिम्मा मुख्य रूप से संगठन महामंत्री पर है…क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह जबलपुर में विवेक तन्खा से कड़े मुकाबले में फंसे हैं…पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की भूमिका भी सीमित है…केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का ध्यान मुरैना सीट निकालने में है…क्योंकि उन्हें पार्टी ने ग्वालियर से मुरैना में शिफ्ट किया है…बचे बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय तो वो पश्चिम बंगाल में बीजेपी को मजबूत करने में लगे हैं….ऐसे में अब बीजेपी को उम्मीद शाह और मोदी की रैलियों भरोसा है…कांग्रेस में प्रचार का जिम्मा मुख्यमंत्री कमलनाथ पर क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर-चंबल में व्यस्त हैं और दिग्विजय भोपाल में…भोपला में चुनाव के बाद दिग्विजय मालवा बेल्ट की कमान संभालेंगे…

  • मालवा-निमाड़: कुल 08 सीट- इंदौर, उज्जैन, धार, रतलाम-झाबुआ, मंदसौर, खंडवा, खरगोन, शाजापुर-देवास
  • रतलाम-झाबुआ कांग्रेस की परंपरागत सीट, कांतिलाल भूरिया और पूर्व नौकरशाह जीएस डामोर में टक्कर
  • देवास में कांग्रेस उम्मीदवार प्रहलाद सिंह टिपानिया और पूर्व जज महेंद्र सिंह सोलंकी में कांटे की टक्कर
  • ग्वालियर-चंबल: कुल 04 सीट- ग्वालियर, गुना, भिंड, मुरैना सिंधिया घराने का मजबूत गढ़ माना जाता है
  • ग्वालियर में महापौर विवेक शेजवलकर और कांग्रेस के अशोक सिंह में टक्कर, सिंधिया फैक्टर अहम
  • बुंदेलखंड: कुल 04 सीट-खजुराहो, टीकमगढ़, सागर, दमोह है यहां जातिगत समीकरण सबसे महत्वपूर्ण हैं
  • दमोह में सांसद प्रहलाद पटेल के सामने कांग्रेस से प्रताप सिंह, ब्राह्मण और ठाकुर महत्वपूर्ण भूमिका
  • महाकौशल: कुल 04 सीट- जबलपुर, छिंदवाड़ा, मंडला, बालाघाट, कमलनाथ की साख दांव पर लगी हुई है
  • छिंदवाड़ा में नकुलनाथ के सामने बीजेपी के नथन शाह कमजोर, जबलपुर में विवेक तन्खा मैदान में हैं
  • विन्ध्य: कुल 04 सीट- सीधी, सतना, रीवा, शहडोल, इन सीटों पर कांग्रेस-बीजेपी में कांटे की टक्कर है
  • सीधी में कांग्रेस के अजय सिंह और बीजेपी की रीति पाठक में टक्कर, ठाकुर, ब्राह्मण और कुर्मी अहम
  • मध्यभारत: कुल 5 सीट- भोपाल, होशंगाबाद, राजगढ़, विदिशा, बैतूल, इस क्षेत्र में आरएसएस का प्रभाव
  • यह क्षेत्र भी आरएसएस के प्रभाव वाला है और इसे हिंदुत्व का गढ़ माना जाता है, बीजेपी को उम्मीदें

मध्यप्रदेश में मुद्दों की बात करें तो मालवा-निमाड़ में बेरोजगारी, महाकौशल में खेती-किसानी तो विन्ध्य में जाति पर चुनाव हो रहा है…. 2014 में  भाजपा ने पहली बार 54.8% वोट लेकर 27 सीटें जीतीं थीं और कांग्रेस को केवल 35.4% वोट मिले थे हालांकि कांग्रेस सिर्फ 2 सीटें जी पाई थी…2009 में कांग्रेस को 40.1% वोट और 12 सीटें मिलीं।…इस चुनाव में बीजेपी 43.4 फीसदी वोट लेकर 16 सीट पर सिमटी गई थी…यहां बसपा का भी असर है देखना होगा कि 2019 में कमलनाथ नाथ कमल खिलने से रोक पाते हैं या फिर पंजा एक बार फिर से इस राज्य को गिरफ्त में लेता है.

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