मोदी की ड्रीम स्कीम के हाल बेहाल, टारगेट से काफी पीछे हैं मुद्रा योजना

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सस्ता कर्ज मुहैया कराने के लिए मोदी सरकार ने मुद्रा योजना की शुरुआत की थी. 8 अप्रैल 2015 को शुरु हुई इस योजना के तहत गैर-निगमित, गैर-कृषि छोटी और लघु इकाइयों को 10 लाख रुपये तक का कर्ज दिया जाता है. ये योजना मोदी की ड्रीम स्कीम थी. लेकिन अब इस योजना का हाल बेहाल है.

मोदी सरकार की ड्रीम स्कीम अपने टारगेट से काफी पीछे है. अगर ये स्कील टारगेट पूरा करना चाहती है तो बैंकों को एक लाख करोड़ रुपये का कर्ज बांटा होगा. बैंकों के पास इतना कर्ज बांटने के लिए सिर्फ 1 महीने का समय है. यानी इस योजना का टारगेट पूरा होना असंभव है. चालू वित्त वर्ष के खत्म होने में अब सिर्फ एक महीने का वक्त बचा है. ऐसे में बैंकों को मुद्रा योजना के तहत 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बांटले के लिए एक महीना ही मिलेगा. सरकारी आंकड़ों में बताया गया है कि 22 फरवरी तक मुद्रा योजना में कुल 2,02,668.9 करोड़ रुपये का कर्ज बांटा गया है

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों में बताया गया है कि इस वित्त वर्ष में अब तक 3.89 करोड़ से ज्यादा मुद्रा ऋण को मंजूरी दी गई है. 2018-19 में सरकार ने 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बांटने का टारगेट रखा था. पीयूष गोयल ने 2019-20 का बजट पेश करते हुए कहा था कि मुद्रा योजना के तहत अब तक 7.23 लाख करोड़ रुपये के 15.56 करोड़ ऋण स्वीकृत किए गए हैं.

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