हिंगोनिया गोशाला: ‘चारे की कमी की वजह से 10 दिनों में मरी 850 गाय’


राजस्थान में नई सरकार बनी है और सरकार ने गायों को बचाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई है. लेकिन जैसे राजे राज में हिंगोनिया में गायों को बचाया नहीं जा सका था वैसे ही गहलोत सरकार भी बेबस नजर आ रही है.

खबर है कि हिंगोनिया गोशाला में बीते कुछ दिनों में सैकड़ों की संख्या में गायों की कथित तौर पर भूख से मौत का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि चारा खत्म होने की वजह से ये हालात पैदा हुए हैं. चारा इसलिए खत्म हुआ क्योंकि चारे की रकम नहीं चुकाने की वजह से आपूर्तिकर्ताओं ने गोशाला को चारा देना बंद कर दिया.

इस घटना में दो लोगों पर कार्रवाई की गई है. बीजेपी के पार्षदों ने जयपुर नगर निगम के बाहर इस सिलसिले में प्रदर्शन किया और कहा है कि गोहत्या के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए. जयपुर के मेयर ने गोशाला के प्रभारी राजेंद्र चित्तोरिया और डॉक्टर कमलेश मीणा को निलंबित कर दिया है.

मेयक ने डिप्टी कमिश्नर आरके मीणा को निलंबित करने के लिए कार्मिक विभाग को पत्र भी लिखा है. हम आपको बता दें कि गोशाला का संचालन अक्षयपात्र फाउंडेशन करता है. बताया जा रहा है कि जो गायों को चारा दिया जा रहा था उसका भुगतान अक्टूबर 2018 से नहीं किया गया था. और करीब 12 करोड़ रूपये का भुगतान चारा वाले को करना है.

हिंगोनिया गोशाला में 23 शेड हैं और करीब 21 हजार मवेशी रहते हैं. जयपुर नगर निगम रोजाना हर मवेशी को 70 रुपये खर्च करता है और बच्चे के चारे के लिए 35 रुपये खर्च किए जाते हैं. खबर ये है कि चारे की कमी की वजह से रोजाना 20 गाय मर रही हैं

दैनिक भास्कर ने 14 फरवरी को एक रिपोर्ट में कहा गया था कि हिंगोनिया गोशाला में 10 दिनों में साढ़े 8 सौ  गायों की मौत होने की बात छापी है. औऱ कहा है कि रोजाना 10 गायों की मौत हो रही है.

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