राहुल ने ऐसा क्या किया जो मोदी-शाह नहीं कर पाए ?

जैसे क्रिकेट के खेल में टाइमिंग बहुत जरूरी है वैसे ही राजनीति में टाइमिंग की भूमिका अहम है. हिंदी पट्टी के तीन राज्यों के नतीजों में ये बात हम देख सकते हैं. छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश बीजेपी के गढ़ माने जाते थे लेकिन दोनों ही जगह पर कांग्रेस ने बीजेपी की उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया. छत्तीसगढ़ में कांगेस ने अप्रत्याशित जीत दर्ज की है.


यहां राहुल गांधी के खेल को समझना बहुत जरूरी है. पूरे चुनाव कैंपेन में उन्होंने मोदी को टारगेट किया और सिर्फ किसानों, बेरोजगारों और करप्शन की बात की. चुनावों के नतीजों के बाद हम ये कह सकते हैं कि उन्होंने इसमें कामयाबी हासिल की है. राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक साथ रखने में कामयाबी हासिल की. राजस्थान में गहलोत और पायलट को एक साथ रखने में भी वो कामयाब रहे. छत्तीसगढ़ में लोग राहुल को देख रहे थे और उन्हें रमन से ज्यादा राहुल पसंद आए. ये जीत महत्वपूर्ण इसलिए है कि ये वो राज्य हैं जहां पर संघ की बहुत मजबूत पकड़ है और बीजेपी से ज्यादा यहां बीजेपी के लिए संघ ने काम किया है.

राहुल की टाइमिंग कमाल की रही

एक साल पहले इस महीने में राहुल कांग्रेस अध्यक्ष बने थे और एक साल बाद उन्होंने तीन राज्य बीजेपी से छीन लिए. लोकसभा चुनाव में सिर्फ चार महीने बाकी है और तीन बड़े राज्यों में राहुल ने कांग्रेस को सत्ता दिला दी. टाइमिंग इसलिए कमाल की है कयोंकि राहुल गांधी ने 2019 के मुक़ाबले का प्लेटफार्म सैट कर दिया है. पंजाब, गुजरात और कर्नाटक के बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव में पार्टी के लिए सकारात्मक परिणाम दिए हैं.

क्षत्रप ज्यादा मोल-भाव नहीं कर पाएंगे

अखिलेश यादव का ये ट्वीट बहुत कुछ कहता है. इन तीन राज्यों के नतीजों के बाद राहुल गांधी को एक फायदा ये हुआ है कि अब ममता बनर्जी, मायावती जैसी नेता का रुख बदलेना. इन नतीजों से राहुल गांधी की  स्वीकार्यता आम मतदाताओं के साथ-साथ दूसरे राजनीतिक दलों में बढ़ेगी.

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