PSU Selling : ‘देश लगातार बिक रहा है, आपको नहीं दिख रहा है’

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PSU Selling : सरकार अगर अपनी पर आ जाए, तो इतने टैक्स से, वो पूरे देश को शानदार मेडिकल, बिजली, पानी, एजुकेशन, स्पोर्ट्स, ट्रांसपोर्ट सब कुछ फ्री दे सकती है, जैसे दिल्ली में मिल रहा है, वो भी बिना कोई टैक्स बढाए, लेकिन केंद्र सरकार को उद्देश्य, केवल देश बेचना है, ताकि दुनिया की सबसे अमीर पार्टी बनी रह सके.

देश लगातार बिक रहा है, आपको नहीं दिख रहा है, ये आपकी गलती है. कौड़ियों के भाव, सरकारी जगहें, PSU बिक रहे हैं.

कुछ प्राइवेट कंपनियां देश को अपने हिसाब से चला रही हैं और आपको लगता है, देश सरकार चला रही है.

सरकार अगर अपनी पर आ जाए, तो इतने टैक्स से, वो पूरे देश को शानदार मेडिकल, बिजली, पानी, एजुकेशन, स्पोर्ट्स, ट्रांसपोर्ट सब कुछ फ्री दे सकती है, जैसे दिल्ली में मिल रहा है, वो भी बिना कोई टैक्स बढाए, लेकिन केंद्र सरकार को उद्देश्य, केवल देश बेचना है, ताकि दुनिया की सबसे अमीर पार्टी बनी रह सके.

पार्टी का विकास होना चाहिए, देश कल बिकता हो तो आज बिक जाए, इनकी बला से!

आप भ्रम में हैं, इस चश्मे को जितना जल्दी उतार दें, देश पर उतना बड़ा अहसान होगा.

PSU Selling चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन बिकाऊ है….. बोलो खरीदोगे!

चंडीगढ़ में प्राइम लोकेशन पर जमीन के क्या रेट चल रहे होंगे?…….बस ऐसे ही जानकारी के लिए पूछ रहा हूँ!………….वैसे सुना है कि भारत में अन्य राज्य की राजधानियों की तुलना में, इस संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ में जमीनो की कीमतें शुरू से ही बहुत अधिक रही है.

माना जाता है आज भी मुंबई बेंगळूरू के बाद सबसे महंगी जमीन चंडीगढ़ में ही है.

दरअसल केंद्र सरकार की मंशा ‘चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास’ की है ओर PPP मॉडल के तहत इस स्टेशन की जल्द ही बोली लगने वाली है ओर अडानी समूह और जीएमआर सहित कम से कम सात कंपनियां इस चंंडीगढ़ रेलवे स्टेशन की व्यावसायिक पुनर्विकास परियोजना हासिल करने की दौड़ में हैं.

हालांकि यह पहला स्टेशन नही है जिसे PPP मॉडल के तहत मोदी सरकार प्राइवेट ऑपरेटर को सौपने जा रही है.

इस से पहले भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन को जुलाई 2016 में बंसल पाथवे को सौप दिया गया था. यह पहला निजी रेलवे स्टेशन है जहाँ रेलवे केवल गाड़ियों का संचालन करेगी तथा रेलवे स्टेशन का संचालन प्राइवेट कंपनी बंसल ग्रुप करेगा.

इस समझौते के बाद हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर गाड़ियों की पार्किंग से लेकर खान-पान तक बंसल ग्रुप के अधीन होगा तथा इससे होने वाली आय भी इसी कंपनी को मिलेगी.

लेकिन चंडीगढ़ ओर हबीबगंज के PPP कांट्रेक्ट के बीच मे जो मूलभूत अंतर है, वह यह है कि हबीबगंज रेलवे स्टेशन की लीज 45 साल की अवधि के लिए सौपी गयी थी लेकिन अब चंडीगढ़ आनंद विहार, सिकंदराबाद, पुणे और बेंगलूरु सिटी के रेलवे स्टेशन को 99 साल की लीज पर प्राइवेट कम्पनियों को सौपा जा रहा है!

ऐसे कुल मिलाकर 68 रेलवे स्टेशन ओर है!

जब पिछली बार यह रेलवे स्टेशन को PPP मॉडल के तहत विकसित करने का जब प्रस्ताव लाया गया था तब बड़ी कंपनियों ने रूचि नही ली थी.

उनका कहना था कि इन रेलवे स्टेशनों में निवेश तभी फलदायी हो सकता है जब उन पर रिहायशी इमारतें बनाने की छूट दी जाए. इसके लिए 99 वर्ष की लीज जरूरी है.

2018 के मध्य में मोदी जी की कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी ओर तभी रेलवे ने स्टेशन पुनर्विकास योजना के आकार को घटाकर 400 स्टेशन पर सीमित किया और इनमें से 68 स्टेशनों का पुनर्विकास प्राथमिकता के आधार पर प्रारंभ करने का निर्णय लिया.

इस योजना के लिए ‘इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलपमेंट कारपोरेशन’ को नोडल एजेंसी बनाया गया ओर उसे रणनीतिक और व्यावसायिक योजना तैयार करने की जिम्मेदारी सौपी गयी…तथा मंत्रालय द्वारा उक्त योजनाओं की मंजूरी के बाद, आइआरएसडीसी तथा अन्य एजेंसियां मिलकर स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए निजी कंपनियों को फ्रीहोल्ड जमीन का हस्तांतरण करेंगी.

जी हाँ, फ्री होल्ड जमींने! वो शहर के सबसे प्राइम लोकेशन यानी रेलवे स्टेशन से बिल्कुल लगी हुई……..

चंडीगढ़ की ही बात करे तो चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन की बोली को जीतने वाली कंपनी को कमर्शियल यूज के लिए करीब 25 लाख स्केयर फुट जगह उपलब्ध होगी, जिनमें 30 फीसदी आवासीय उद्देश्य के लिए होगी.

सूत्र कह रहे हैं कि ‘डेवलपमेंट मिश्रित उपयोग वाला होगा, जिससे कंपनियों को फायदा होगा. इसमें स्टेशन परिसर में आवासीय अपार्टमेंट बनाए जाएंगे.

इसके साथ ही परियोजना को अग्रणी बैंकों से बुनियादी ढांचा का दर्जा दिया जाएगा………….यानी अडानी या GMR जैसे प्राइवेट कंपनियों को बुनियादी ढांचे विकसित करने के नाम पर सस्ता कर्ज ओर लगभग मुफ्त के भाव 99 साल की लीज पर प्राइम लोकेशन की जमीन और बात करना ‘मैं देश नही बिकने दूँगा’ की?

आप ध्यान दीजिए कि प्राइवेटाईजाइशेन के लिए जनता के दिमाग मे यह छवि गढ़ी जाती हैं कि रेलवे स्टेशन पर बुनियादी सुविधाएं भी मौजूद नही है, न ही कोई साफ सफाई है.

चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन देश के रेलवे स्टेशन की स्वच्छता रैंकिंग 2006 में जहां छठवें स्थान पर था.

वहीं, 2016 में 32वें, 2017 में 48वें, 2018 में 55वें व 2019 में सीधे 130 वे स्थान पर धकेल दिया गया.

इस महीने की शुरूआत में जब रेल क्लीनलिनैस सर्वे टीम ने चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से सफर करने वाले 333 यात्रियों से बात की.

इनमें से 326 लोगों ने स्टेशन की सफाई व्यवस्था को बेहतर बताया लेकिन उसके बावजूद प्रोसैस इवैल्यूवेशन स्कोर में काफी कम अंक चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन को दिए गए ….यानी षणयंत्र पूर्वक यह कार्य किया जा रहा है ताकि रेलवे स्टेशन के निजीकरण को सही ठहराया जा सके……..

अगर पूरे देश मे रेलवे के आधिपत्य की जमीनों का सर्वे किया जाए तो यह जमीनें किसी भी छोटे से राज्य से अधिक निकलेगी……..मोदी सरकार इन बेशकीमती जमीनों को कौड़ियों के भाव में 99 साल की लीज अडानी जैसे उद्योगपतियो को सौप देना चाहती है…….यही तो विकास है………!

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