कृषि कानून वापस लेने के बाद BJP ने UP में शुरू किया बड़ा ऑपरेशन, सपा ध्यान दे

5 राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले है, जिनमें UP सबसे बड़ा राज्य है. जहाँ एक दिन पहले ही अमित शाह को वेस्ट UP की कमान सौंपी गई थी. लेकिन गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व के दिन PM मोदी ने कृषि कानून वापस लेने की घोषणा कर सबको चौंका दिया.

मोदी सरकार के इस फैसले के पीछे उत्तर प्रदेश और पंजाब दोनों कारण हैं. जाहिर है उत्तर प्रदेश चुनाव पर असर मुख्य वजह है. राजनीति को करीब से समझने वाले मानते हैं कि ‘चुनाव में हार’ बीजेपी की दुखती रग है. बीजेपी को जहाँ कहीं अपने फैसले चुनाव में हार की वजह बनते दिखते हैं, वो उन पर दोबारा विचार या समझौता ज़रूर करती है.

इसी महीने उपचुनाव में बीजेपी का वैसा प्रदर्शन नहीं रहा जैसा उसे उम्मीद थी. उत्तर प्रदेश जहाँ से लोकसभा की 80 सीटें आती हैं, वहाँ की सीटों में उलटफेर, बीजेपी के 2024 के लोकसभा चुनाव तक को प्रभावित कर सकता है. प्री इलेक्शन सर्वे किसान आंदोलन का असर UP में 100 सीटों पर होने का दावा कर रहे थे.

मोदी सरकार के फैसले से इस बात पर मुहर लगती दिख रही है कि बीजेपी को भी इनपुट मिले होंगे की किसान आंदोलन से चुनाव पर कितना असर पड़ रहा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाके में जयंत चौधरी को भी अच्छा सपोर्ट मिल रहा था, जिस वजह से समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव से अगर आरएलडी का गठबंधन हो जाता तो, समाजवादी पार्टी को फायदा होता.

आंकड़ों में समझिए पीएम मोदी के बैकफुट पर आने का मतलब

सीएसडीएस के आँकड़ों के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जातिगत समीकरण कुछ ऐसा है. वहाँ  मुसलमान 32 फ़ीसदी, दलित तकरीबन 18 फ़ीसदी हैं, जाट 12 फ़ीसदी और ओबीसी 30 फ़ीसदी हैं. साथ ही ध्यान देने वाली बात ये भी हे कि इस इलाके में लगभग 70 फ़ीसदी लोग किसानी ही करते हैं.

इनमें से मुसलमान को अपना वोट बैंक बीजेपी कभी मान कर नहीं चलती. दलितों और ओबीसी को अपने साथ मिलाने के लिए बीजेपी कई सम्मेलन पहले से आयोजित कर रही है. हाल ही में उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह का दलितों के घर जाकर चाय पीने वाला बयान भी काफ़ी सुर्खियों में रहा था.

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अब कृषि क़ानून को वापस लेने की वजह से 12 फ़ीसदी नाराज़ जाट वोट भी बीजेपी के पाले में आ जाएँगे, तो तस्वीर बीजेपी के लिए अच्छी बन सकती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश कवर करने वाले पत्रकार बताते हैं, इस फैसले के बाद बीजेपी की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जितनी सीटें पहले घटती, शायद अब उससे कम घटेंगी.

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