RBI को बर्बाद कर देगी मोदी सरकार?

RBI ने केंद्र सरकार बात मानते हुए सरकार को वित्तीय घाटे का लक्ष्य पूरा करने में मदद देने के लिए हामी भर दी है. अगर ऐसा होता है कि इससे सरकार को बैंकों को अतिरिक्त पूंजी देने में आसानी होगी. सरकार ने रिजर्व सरप्लस में से सरकार को कितना मिले, ये तय करने के लिए दिसंबर 2018 में जालान कमेटी गठित की थी. अब उसकी सिफारिशें मान ली हैं.

जालान कमेटी की सिफारिशें मानने के बाद RBI  सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर करेगी. रिजर्व बैंक ने बिमल जालान कमेटी की सिफारिशें मानते हुए सोमवार को इसकी मंजूरी दी. RBI के सरप्लस फंड में से सरकार को कितनी रकम मिलनी चाहिए, ये तय करने के लिए जालान कमेटी का गठन किया गया था. जालान कमेटी का गठन पिछले साल दिसंबर में RBI के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता किया गया था. 1.76 लाख करोड़ करोड़ रुपए में 1 लाख 23 हजार 414 करोड़ 2018-19 के लिए सरप्लस और 52 हजार 637 करोड़ रुपए संशोधित इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क (ECF) के मुताबिक तय हुए अतिरिक्त प्रोविजन के तहत दिए जाएंगे. सरकार लंबे वक्त से इसकी कोशिश में लगी हुई थी.

RBI के कुल एसेट के 28 फीसदी है रिजर्व फंड

सरकार और आरबीआई के बीच लंबे वक्त से इसको लेकर विवाद चल रहा था. कैश सरप्लस सरकार को देने के लिए केंद्रीय बैंक राजी नहीं था. लेकिन अब RBI ने हामी भर दी है. इसी वजह से आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने पिछले साल दिसंबर में इस्तीफा दे दिया था. कई अनुमानों के मुताबि आरबीआई के पास 9 लाख करोड़ रुपए का सरप्लस फंड है. यानी ये RBI के कुल एसेट का 28 फीसदी है. सरकार का कहना था कि दूसरे बड़े देशों के केंद्रीय बैंक अपने एसेट का 14% रिजर्व फंड में रखते हैं. यानी आरबीआई भी अपने रिजर्व फंड का आंकड़ा कम करें. कांग्रेस ने इसको लेकर सरकार को घेरा है.

सरकार आर्थिक मंदी से जूझ रही है और ऐसे में रिजर्व बैक का सरप्लस फंड मिलने से उसका वित्तीय घाटा काबू में आएगा. क्योंकि सरकार ने चालू वित्त वर्ष में GDP के 3.3% के बराबर वित्तीय घाटे का लक्ष्य रखा है.  सरकार को कितना फंड दिया जाए ये तय करने के लिए पहले भी 3 समितियां बनी थीं. वी सुब्रमण्यम (1997), उषा थोराट (2004) और वाई.एस. मालेगाम (2013) समिति लेकिन इसके कुछ निकला नहीं. सुब्रमण्यम समिति ने 12% और थोराट समिति ने 18% रिजर्व की सिफारिश की थी. लेकिन आरबीआई ने थोराट कमेटी की सिफारिश को न मानते हुए सुब्रमण्यम कमेटी की सिफारिश को ही जारी रखा था.

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