क्या कांग्रेस के पास गांधी परिवार के बाहर कोई विकल्प नहीं है ?

लंबे ड्रामे के बाद कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी के नाम पर मुहर लगा दी गई. शनिवार देर रात तक चली कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनियां गांधी को अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया गया. बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इस बात की जानकारी दी.

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के इस फैसले के बाद ट्विटर पर कांग्रेस का फैमिली ड्रामा ट्रेंड कर रहा है. यहां सवाल ये भी है कि जब कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष चुनने में इतना लंबा वक्त लगा और इतनी खींचतान हुई तो पूर्णकालिक अध्यक्ष चुनने के लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ेगी. इस बैठक में राहुल गांधी का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया गया. इस बैठक के पहले ये कयास लगाए जा रहे थे कि हो सकता है कि कांग्रेस के बाहर कोई नेता पार्टी की कमान संभाले. लेकिन जब बैठक खत्म हुई तो कोई नया नाम सामने नहीं आ पाया.

कांग्रेस का बोझ बन गया गांधी परिवार

क्या वाकई में कांग्रेस के पास ऐसा कोई नेता नहीं है तो पार्टी की कमान संभालने का दम रखता हो. या फिर पार्टी गांधी परिवार के बाहर किसी और को ये जिम्मेदारी देना ही नहीं चाहती. इसमें कोई दोराय नहीं है कि इस वक्त कांग्रेस की हालात बहुत ही खस्ता है. कुछ महीनों में चार राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं. पार्टी को यहां पर बीजेपी से सीधा मुकाबला करना है. लेकिन पार्टी के पास कोई पुर्णकालिक अध्यक्ष नहीं है. इस वक्त कांग्रेस की हालत देखकर ऐसा लगता है कि गांधी परिवार कांग्रेस का बोझ बन गया है. जिसे उतारना आसान नहीं है.

एक बार फिर से गांधी परिवार के भीतर के किसी नेता को पार्टी की कमान मिलने से ये साफ हो गया कि पार्टी के किसी नेता में ये हिम्मत नहीं है कि वो गांधी परिवार के बाहर के किसी नेता को कांग्रेस की कमान संभालने की वकालत करे. हालांकि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेताओं में से एक मुकुल वासनिक के नाम कि चर्चा चल रही थी लेकिन CWC की बैठक में शायद ही इन नामों की चर्चा हुई हो. शायद ही किसी ने इनके नाम का प्रस्ताव दिया हो.

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सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद एक सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सोनिया गांधी के नेतृत्व में ही कांग्रेस आगामी चुनाव लड़ेगी. क्या सोनिया गांधी ही बाद मे पूर्णकालिक अध्यक्ष भी बन जाएंगी.

इस वक्त कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो पार्टी के आंतरिक चुनाव पर फोकस करे या फिर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मेहनत करे. कांग्रेस के लिए इस वक्त जरूरी यही है कि वो अंतरिम अध्यक्ष के कार्यकाल को ज्यादा लंबा ना करे और जल्द से जल्द पूर्णकालिक अध्यक्ष के लिए चुनाव कराए.

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