अर्थव्यवस्था के बुरे दिन, 8 कोर इंडस्ट्री की ग्रोथ में गिरावट

नोटंबदी और जीएसटी के बाद से अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मोदी सरकार मात खा रही है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून में कच्चे तेल का उत्पादन एक साल पहले के इसी महीने की तुलना में 6.8 फीसदी नीचे चला गया है और दूसरी तरफ तेल रिफाइनरी उद्योग के उत्पादन में सालाना आधार पर 9.3 फीसदी तक की गिरावट आई है. कुल मिलाकर आठ कोर इंडस्ट्री में ग्रोथ काफी कम है.

जून का महीना मोदी सरकार और अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत नहीं दे रहा है. बुनियादी उद्योगों की वृद्धि की रफ्तार जून महीने में काफी सुस्त रही. सरकारी आंकड़ों पर अगर ध्यान दें तो खनिज तेल और तेल रिफाइनरी के अलावा सीमेंट उत्पादन भी घट गया है. इतना ही नहीं. 8 कोर इंडस्ट्री की हालत खराब है. इस इंडस्ट्री में वृद्धि दर जून में घटकर 0.2 प्रतिशत पर आ गई है. सरकार ने बुधवार को मई महीने के बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर के आंकड़े को घटाकर 4.3 प्रतिशत कर दिया. पहले इसका अनुमान 5.1 फीसदी रहने का अनुमान था. 8 कोर इंडस्ट्री जिसमें कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन शामिल है उनकी ग्रोथ जून 2018 में 7.8 फीसदी बढ़ी थी.

वहीं अगर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी में देखें तो आठ बुनियादी उद्योगों का भारांश 40.27 प्रतिशत है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जून में कच्चे तेल का उत्पादन काफी कम हुआ है. बीते साल जितना उत्पादन था वो इस साल 6.8 फीसदी गिर गया है. जून, 2018 में इस क्षेत्र का उत्पादन 12.1 प्रतिशत बढ़ा था. लेकिन इस बार इसमें काफी गिरावट आई है. जून महीने में प्राकृतिक गैस का उत्पादन भी घटा, सीमेंट उत्पादन भी एक साल पहले के इसी माह से 1.5 प्रतिशत कम रहा. तो कुल मिलाकर ये अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं. कुल क्षेत्रों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई जैसे इस्पात उत्पादन में 6.9, बिजली उत्पादन में 7.3 फीसदी वृद्धि दर्ज की गयी.

चालू वित्त वर्ष की अप्रैल जून की तिमाही में 8 कोर इंडस्ट्री की वृद्धि दर घटकर 3.5 फीसदी पर आ जाने से चिंता गहरा गई है क्योंकि ये इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 5.5 फीसदी पर थीं. कोर इंडस्ट्री के ये आंकड़े बताते हैं कि बुनियादी उद्योग की वृद्धि दर काफी कम रहने के साथ वाहन उत्पादन और गैर तेल वस्तुओं का निर्यात भी घटा है. इन आंकड़ों की वजह से अगस्त, 2019 की मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर में कटौती की गुंजाइश बढ़ गई है.

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