राहुल का ‘न्याय’ या मोदी का सवर्णों को आरक्षण कौन सा गेमचेंजर दांव है?

RAHUL AND MODI

चुनावी साल में सत्ताधारी बीजेपी ने लोकलुभावन योजनाओं का एलान किया जिसमें सवर्णों को 10 फीसदी आऱक्षण भी शामिल था. वहीं राहुल गांधी ने मोदी सरकार को चित करने के लिए ‘न्याय’ योजना का एलान किया है. इन दोनों में से गेमचेंजर कौन सा दांव है ये आप समझिए.

दुनिया की नामी रिसर्च ऑर्गनाइजेशन ‘द वर्ल्ड इनइक्वलिटी लैब’ ने भारत में गरीबों को लुभाने के लिए भाजपा और कांग्रेस की योजनाओं पर रिसर्च किया है. इस रिसर्च में कांग्रेस की न्याय यानी (न्यूनतम आय योजना) योजना भी है. इनइक्वलिटी की रिसर्च कहती है कि राहुल गांधी की ‘न्याय’ योजना गेमचेंजर हो सकती है.

इनइक्वलिटी ने ये भी कहा है कि मोदी सरकार ने सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का जो दांव चला है उसका फायदा गरीब सवर्णों को ना होकर सिर्फ अमीरों को होगा. इनइक्वलिटी लैब के को-डायरेक्टर ल्यूकस चांसेल ने कहा कि,

‘आगामी सरकार को आर्थिक असमानता दूर करने के लिए प्रतिबद्ध होकर काम करने होंगे क्योंकि अबतक की सरकारों ने इसमें उदासीनता दिखाई है’


लैब ने अपने रिसर्च में बता है कि 1980 से ही 0.1 फीसदी धनकुबेरों ने देश की 50 फीसदी आबादी की तुलना में अधिकांश संपत्ति पर कब्जा कर रखा है.


इनइक्वलिटी लैब ने 2019 के लोकसभा चुनाव को जीतने के लिए राजनीतिक दलों ने जिन योजनाओं का एलान किया है उनका भी रिसर्च किया है. लैब के तुलनात्मक रिसर्च में राहुल की ‘न्याय’ मोदी की योजना पर भारी पड़ रही है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा 25 मार्च, 2019 को घोषित न्याय योजना से देश के करीब 20 फीसदी यानी कुल 5 करोड़ गरीब परिवारों के 25 करोड़ लोगों को न्यूनतम आय की गारंटी के तहत सीधे फायदा हो सकता है. योजना के मुताबिक इतनी बड़ी आबादी को हरेक महीने 6,000 रुपये खाते में कैश डाले जाएंगे. सालाना यह रकम 72,000 होगी

लैब ने अपनी रिसर्च में बताया है कि ये योजना गेमचेंजर है क्योंकि इससे जीडीपी पर 1.3 फीसदी का बोझ आएगा और इस बोझ से करीब 33 फीसदी गरीब परिवारों की आर्थिक मदद हो सकेगी. लैब का मानना है कि इस योजना से गरीबों की जिंदगी में अप्रत्याशित बदलाव की उम्मीद है. रिसर्च में कहा गया है कि गरीबों की न्यूनतम आय बढ़ने से न केबल सामाजिक खर्च बढ़ेगा बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बदलाव आएगा.

लैब ने सवर्ण आरक्षण पर भी किया है शोध

लैब ने मोदी सरकार में सवर्णों क दिए गए 10 फीसदी आरक्षण पर भी रिसर्च किया. लैब का मानना है कि इससे गरीबों को नहीं बल्कि अमीरों को ज्यााद फायदा होगा. लैब की रिसर्च की माने तो ये पॉलिटिकल स्टंट है. लैब का मानना है कि इसमें जो आरक्षण के हकदार के रूप में जो नियम हैं उससे बड़ी आबादी इसकी हकदार बन गई है. रिपोर्ट में बताया गया है कि,

  • करीब 93 फीसदी आबादी 8 लाख की आय सीमा के दायरे की वजह से
  • 96 फीसदी कृषि भूखंड पैमाने के हिसाब से
  • 80 फीसदी आवासीय परिसर के पैमाने से
  • 73 फीसदी शहरी आबादी रेससिडेंशियल प्लॉट के पैमाने की वजह से

आरक्षण की हकदार हो गई है. रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर सरकार वाकई में गरीब सवर्णों को आरक्षण का फायदा देना चाहती थी तो वार्षिक आय का पैमाना 2 लाख रुपये पर तय किया जाना चाहिए था.लेकिन आरक्षण के नियम से लगता है कि इसका राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश की गई है.

लैब की ये रिपोर्ट लोकसभा चुनाव के नतीजों पर कोई फर्क डालेगी या नहीं ये तो नहीं कहा जा सकता लेकिन राहुल की न्याय योजना को लैब ने 100 में से 100 नंबर दिए हैं. गरीबी मिटाने के लिए बनाई गई योजनाओं में राहुल की न्याय को लैब ने अच्छा माना है.

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