लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा कौन सा है ?

लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार और दूसरा मुद्दा स्वास्थ्य होगा. 2014 की तरह भ्रष्टाचार 2019 के चुनाव में ज्यादा बड़ा मुद्दा नहीं होगा. एडीआर ने अक्टूबर से दिसंबर के बीच में सर्वे किया था.

मोदी को पीएम बनाने में करप्शन का मुद्दा बहुत बड़ा था. 2014 में अन्ना आंदोलन के बाद करप्शन बहुत बड़ा मुद्दा बना और कांग्रेस की सरकार चली गई. लेकिन इस बार रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा होगा. चुनावी आंकड़ों पर काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है. लखनऊ में जारी की गई इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि आने वाले चुनाव में रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा होगा और दूसरे नंबर पर स्वास्थ्य का मुद्दा रहेगा.

40 हजार लोगों था सैंपल

एडीआर ने ये सर्वे यूपी की 80 लोकसभा सीटों पर करीब 40 हजार मतदातों के बीच किया है. अक्टूबर से दिसंबर के बीच हुए इस सर्वे में एडीआर ने कई आंकड़े जमा किए हैं. इस रिपोर्ट में पहले नंबर पर रोजगार, दूसरे नंबर पर स्वास्थ्य और तीसरे नंबर पर कानून व्यवस्था का मुद्दा रहा. इस सर्वे में लोगों ने करप्शन से ज्यादा रोजगार की बात की है. रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि मौजूदा सरकार से लोग खुश नहीं हैं.

ग्रामीण इलाकों में कर्जमाफी है मुद्दा

ग्रामीण इलाकों में कर्जमाफी सबसे बड़ा मुद्दा है और किसानों ने कहा है कि कर्जमाफी के मुद्दे पर वो वोट करेंगे. एडीआर की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि राजनीतिक दलों में आपराधिक और आर्थिक रूप से मजबूत लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है. यूपी के 34 MLA की आय में 300 गुना की वृद्धि हुई, कई विधायकों की औसत संपति 2007 में एक करोड़ रुपये थी. 2017 में बढ़कर 7 करोड़ रुपये हो गई है. साथ ही फिर से चुनाव लड़ने वालों की आय में करीब 60 गुना बढ़ोत्तरी दर्ज की गई.

पैसेवालों को मिली वरीयता

रिपोर्ट में कई बातें निकल सामने आई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक यूपी के चार प्रमुख दलों में आर्थिक रूप से मजबूत उम्मीदवारों को टिकट दिया. 31 विधायकों की 2007 में औसत संपत्ति 1.4 करोड़ थी. जो 2017 में बढ़कर 7.74 करोड़ हो गई. इस संपत्ति की घोषणा विधायकों के द्वारा ही की गई.

रिपोर्ट में बताया गया है कि यूपी में जिन पांच सांसदों की संपत्ति सबसे ज्यादा है उनमें राहुल गांधी (कांग्रेस)- 1597% बढ़ोत्तरी, मुलायम सिंह यादव ( सपा) -1283% बढ़ोत्तरी,  सोनिया गांधी (कांग्रेस) -984%बढ़ोत्तरी, मेनका गांधी (बीजेपी) -460%बढ़ोत्तरी और ब्रज भूषण शरण सिंह (बीजेपी) -72%बढ़ोत्तरी के साथ पांचवें नंबर पर हैं.

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