पुलवामा हमला: चूक कहां हुई और अब भारत बदला कैसे लेगा ?

पुलवामा हमले के बाद इस हमले से जुड़े हुए नए नए खुलासे हो रहे हैं. शहीद जवानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से लदी एक कार को CRPF के काफिले से भिड़ाकर धमाका किया और इसमें करीब 200 किलो से ज्यादा विस्फोटक इस्तेमाल किया गया.

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. और पूरी दुनिया ने इस हमले की निंदा की है. एनआईए ने इस हमले की जांच शुरु कर दी है. खबरें तो यहां तक आ रही हैं कि खुफिया एजेंसियों ने पहले ही अंदेशा जताया था कि इस तरह का हमला हो सकता है. एक चिट्ठी की भी चर्चा है जिसमें कहा गया है कि 8 फरवरी को इस सिलसिले में एक अलर्ट भी जारी किया गया था.

आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों के आवागमन के लिए एक तय प्रक्रिया है और उनतके काफिले के आने जाने के से इलाके में रोड ओपनिंग पार्टी यानी आरओपी इसके लिए हरी झंडी देती है. आरओपी में जो लोग तैनात होते हैं वो जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान होते हैं. जो चिट्ठी लीक हुई है उसमें इस बात का जिक्र है कि आरओपी अलर्ट रहे

इसके अलावा देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए 12 फरवरी को भी एक अलर्ट जारी किया गया था. अलर्ट में कहा गया था कि जैश सैन्य बलों पर हमला कर सकता है. जैश ने कुछ दिनों पहले एक वीडियो भी जारी किया था जिसमें कहा गया था कि वो हमला करने की तैयारी कर रहा है. इसमें अफगानिस्तान में इसी तरह का हमला दिखाया गया था.

अगर सभी कड़ियों को जोड़ें तो ये बात साफ होती है कि पुलवामा में हुआ हमला सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक है. इस हमले के बाद देश बदला चाहता है लेकिन सरकार के पास रास्ते क्या हैं ये देखना अहम होगा. क्योंकि जम्मू कश्मीर में जो इस वक्त राज्यपाल शासन है लिहाजा मोदी सरकार की जिम्मेदारी बढ़ जाती है.

अब क्या भारत सिंधु जल संधि तोड़ेगा. क्या पाकिस्तान पर सीधा हमला करेगा. क्या कश्मीर के भीतर कोई बड़ा ऑपरेशन चलाया जाएगा. हुर्रियत जैसे संगठनों पर क्या कार्रवाई करेगा भारत. क्योंकि अगर भारत ने कार्रवाई नहीं की तो भी देश का आक्रोश बढ़ेगा.

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