महाराष्ट्र: क्या कांग्रेस की रणनीति कामयाब होगी ?

राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. महाराष्ट्र में भी वो बदलाव दिखाई देता है. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस युवाओं को तरजीह दे रही है और कई ऐसे युवा कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं जो विदेश से लौटे हैं. बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के लिए योजना बनाई गई है.

महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस “चलो पंचायत” अभियान चला रही है. पार्टी का लक्ष्य है कि पांच करोड़ लोगों तक पहुंचे और उन्हें कांग्रेस से जोड़े. चलो पंचायत अभियान में  बेरोज़गार युवा पंजीकरण, किसान शक्ति कार्ड पंजीकरण, किसान कर्ज़ माफ़ी, युवा कांग्रेस के द्वार खोल रहे हैं. कांग्रेस की कोशिश है कि जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं में जोश भरा जाए. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 सीटों में से कांग्रेस को सिर्फ 2 सीटों पर जीत मिली थी.

कांग्रेस जानती है कि 2014 में कांग्रेस की हार की सबसे बड़ी वजह ये थी कि युवा मोदी की ओर झुक गए थे. अब कांग्रेस युवाओं पर ज्यादा फोकस कर रही है. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी साथ मिलकर लड़ेंगे लेकिन ये नहीं भूलना चाहिए कि एक बाद जनता इस गठबंधन को नकार चुकी है. उस समय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान थे. 1999 में कांग्रेस में विभाजन के बाद पार्टी अपने दम पर सत्ता में नहीं आयी है.

हालांकि महाराष्ट्र कांग्रेस का गढ़ रहा है यही पर कांग्रेस का 135 साल पहले जन्म हुआ था. यहां कांग्रेस बाकी राज्यों की तरह कमजोर नहीं हुई है. और इसका कारण ये है कि यहां किसान कांग्रेस के साथ हैं. कांग्रेस को राज्य में सहकारी आंदोलन से काफी फायदा हुआ है. हालांकि पार्टी के नेता कहते हैं कि कांग्रेस ने विकास के जो काम किए हैं उसका फायदा होगा.

2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एनसीपी के साथ मिलकर लड़ेगी. दोनों पार्टियों में 48 सीटों में से 40 पर बात बन गई है. अब देखना ये होगा कि कांग्रेस में बदलाव लाकर क्या राहुल गांधी एक बार फिर से पार्टी को महाराष्ट्र में सत्ता दिला पाएंगे.

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