CBI बनाम CBI: अलोक वर्मा सरकार को खटक क्यों रहे थे?

सीबीआई की साख जितनी गिरनी थी उतनी गिर चुकी है और अब इसमें कुछ बाकी नहीं बचा है. लोग तो कांग्रेस के जमाने से ही इस जांच एजेंसी को लेकर खुश नहीं थे लेकिन भरोसा था अब शायद वो भी मर गया है. अलोक वर्मा और राकेश अस्थाना मामले में करीब दो महीनों से सीबीआई में खींचतान चल रही थी. आखिरकार अलोक वर्मा को फिर हटा दिया गया है. हालांकि निदेशक पद से हटाए गए आलोक वर्मा ने पीटीआई से बात करते हुए कहा है कि

‘झूठे, अप्रमाणित और बेहद हल्के’ आरोपों को आधार बनाकर उनका ट्रांसफ़र किया गया है.ये आरोप भी सिर्फ़ एक शख़्स ने लगाए हैं और जो उनसे द्वेष रखते हैं.

खैर आलोक  वर्मा की सफाई सुनने वाला अब कोई नहीं है. क्योंकि गुरुवार को उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्च अधिकार प्राप्त समिति ने सीबीआई के निदेशक पद से हटा दिया है. आपको बता दें कि इस समिति में जस्टिस एके सीकरी और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं. अपने बचे हुए कार्यकाल में अलोक वर्मा अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड के महानिदेशक होंगे. वर्मा ने दो दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई के निदेशक का पद एक बार फिर से संभाला था. वर्मा को अक्टूबर 2018 में छुट्टी पर भेजा गया था. चलिए आपको बता दें कि वर्मा किन किन मामलों की जांच कर रहे थे. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक आलोक वर्मा कुछ बेहद संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे थे.

  1. राफेल सौदा घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व बीजेपी नेता यशवंत सिंहा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने चार अक्टूबर को सीबीआई में 132 पेज का शिकायत पत्र सौंपा था, जिसे आलोक वर्मा ने स्वीकार किया था. इस शिकायत की सत्यापन प्रक्रिया एजेंसी के अंदर चल रही थी.
  2. सीबीआई मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया रिश्वत मामले में हाई-प्रोफाइल लोगों की भूमिका की जांच कर रही थी. इस मामले में हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज आईएम कुद्दूसी को गिरफ्तार किया गया था.
  3. प्रधानमंत्री के सचिव IAS अफसर भास्कर कुल्बे की कोयला खदानों के आवंटन में कथित भूमिका को लेकर सीबीआई जांच कर रही है.
  4. सीबीआई नितिन संदेसरा और स्टर्लिंग बायोटेक मामले की जांच खत्म करने वाली थी. इस मामले में सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की कथित भूमिका को लेकर जांच की गई थी.
  5. मेडिकल एडमिशन में कथित भ्रष्टाचार मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस एसएन शुक्ला पर आरोप थे और एजेंसी ने इस मामले को अपनी जांच में शामिल किया था. शुरूआती जांच पूरी हो गई थी और इसमें सिर्फ आलोक वर्मा के हस्ताक्षर बाकी थे.
  6. वित्त और राजस्व सचिव हसमुख अधिया के खिलाफ की गई शिकायत भी सीबीआई जांच के दायरे में थी.

विपक्ष का साफ-साफ कहना था कि अलोक वर्मा को हटाने के पीछे यही मामले हैं क्योंकि सरकार नहीं चाहती थी कि सीबीआई राफेल मामले में कोई भी जांच करे. इन्हीं मामलों के चलते अलोक वर्मा को सीबीआई के निदेशक पद से हटाया गया. ये भी कहा जा रहा है कि सरकार ने इस मामले को प्रतिष्ठा से जोड़ लिया था. लोकसभा चुनाव में इस मामले को कांग्रेस उठा सकती थी लिहाजा बीजेपी सरकार के लिए अलोक वर्मा का पद पर रहना मुश्किलें खड़ी कर सकता था.

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