सवर्ण आरक्षण का ‘ब्रह्मास्त्र’ क्या विपक्ष को बेदम कर सकता है ?


राजनीति में नेता चालें बहुत सोच समझकर चलते हैं. मोदी ने 10 फीसदी आरक्षण का दांव चला है वो विपक्ष को बेचैन कर रहा है. लेकिन क्या ये दांव विपक्ष को बेदम करने का दम रखता है. इसको समझने के लिए आपको ये समझना होगा कि सवर्ण वोट राजनीति में कितना असर रखता है. अगर सेंटर फॉर स्टडी ऑफ़ डेवेलपिंग सोसाइटी (सीएसडीएस) के सर्वे की बात करें तो उसके अनुसार देश सवर्ण जातियों के लोगों की संख्या 20 से 30 फीसदी के करीब है.

‘बिहार में 18 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 22 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 25 प्रतिशत, दिल्ली में 50 प्रतिशत, झारखंड में 20 प्रतिशत, राजस्थान में 23 प्रतिशत, हरियाणा में 40 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 12 प्रतिशत सवर्ण जातियों के लोग हैं’

‘असम में 35 प्रतिशत, गुजरात में 30 प्रतिशत, कर्नाटक में 19 प्रतिशत, केरल में 30 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 30 प्रतिशत, ओडिशा में 20 प्रतिशत, तमिलनाडु में 10 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 48 प्रतिशत और पंजाब में 48 प्रतिशत है.’

2014 में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जबरदस्त प्रदर्शन किया था. इन राज्यों में बीजेपी की सवर्ण जातियां में जबरदस्त पकड़ है. चुनाव कवर करने वाली एजेंसियां बताती हैं सवर्ण मतदाताओं ने बीजेपी को एकतरफा समर्थन दिया है. मोदी ने आरक्षण को लेकर जो स्लॉट बनाया है उसमें

‘जिस परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपए से कम होगी, जिनके पास 5 हेक्टेयर से कम कृषि योग्य ज़मीन होगी, जिनके पास 1000 वर्ग फुट से कम का मकान होगा या जिनके पास नगरपालिका में शामिल 100 गज़ से कम ज़मीन होगी या नगरपालिका में ना शामिल 200 गज़ से कम ज़मीन होगी. उन्हें 10 फीसदी आरक्षण मिलेगा’

अगर इस तरह देखें तो 10 फीसदी में सवर्ण जातियों के करीब 85 से 90 फीसदी लोगों को आरक्षण मिल जाएगा. अब देखना ये होगा कि बीजेपी को 2014 के मुकाबले 2019 में ज्यादा इस दांव से ज्यादा वोट मिल सकते हैं. तो आप ये मानकर चलिए ऐसा मुश्किल है. क्योंकि पहली बात तो ये है कि देश में सवर्णों की संख्या उतनी नहीं है और जो संख्या है वो पहले से ही बीजेपी को वोट देती रही है. हां उत्तरभारत के तमाम राज्यों में सवर्ण निर्णायक भूमिका में रहे हैं लेकिन इसका आंकड़ा अभी मौजूद नहीं कि इन राज्यों में सवर्ण कितने हैं. हां हो ये सकता है कि बीजेपी से सवर्ण रूठ गए गए वो मान जाएंगे.

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