रामलीला में राम मंदिर के लिए रण का ऐलान या सिर्फ राजनीति ?

दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली, 9 दिसंबर की सुबह से ही ठहर सी गई. रामलीला मैदान की ओर जाने वाले ज्यादातर रास्तों पर सिर्फ भगवा रंग से सजी हुई बसें, भगवा झंडे और भगवा गमछा डाले हुए वीएचपी, आरएसएस के कार्यकर्ता नजर आ रहे थे. राम के जयकारों से रामलीला मैदान और मैदान की ओर जानेवाली हर सड़क गुंजायमान थी. वीएचपी का दावा था कि रामलीला मैदान में करीब पांच लाख की भीड़ जुटेगी लेकिन भीड़ का आंकड़ा थोड़ा कम था. फिर भी अच्छी खासी तादाद में लोग राम मंदिर निर्माण के लिए हो रही धर्मसभा में शामिल होने के लिए पहुंचे थे.

तुर्कमान गेट से राजघाट के लिए जो सड़क जाती है वहां रैली में आई बसें कतार में लगी थीं. साधु संतों के लिए एक भव्य मंच का निर्माण किया गया था जिसपर करीब दो दर्जन से ज्यादा संतों और वीएचपी,आरएसएस के लोगों के बैठने का इंतजाम था. मैदान में पहुंचे वक्ताओं को अच्छी तरह से सुन सकें इसके लिए बड़े बड़े टीवी स्क्रीन लगाए गए थे. सभी साधु संतों ने एक सुर में राम मंदिर निर्माण का रास्ता निकालने के लिए हुंकार भरी और कहा कि सरकार इसको लेकर सार्थक कदम उठाए. संतों ने भी कहा कि अगर राम मंदिर के लिए कोई रास्ता नहीं निकला तो संत चुप नहीं बैठेंगे.

चुंकि आरएसएस और वीएचपी इन दिनों राममंदिर निर्माण के लिए कुछ ज्यादा ही संवेदनशील दिखाई दे रही है इसलिए धर्मसभा में आरएसएस में नंबर दो और सबसे बड़े अधिकारी सर- कार्यवाह भैयाजी जोशी ने मंदिर निर्माण को लेकर संतों के सुर में सुर मिलाया.  

”जो लोग आज सत्ता में हैं, उन्होंने राम मंदिर बनाने का वादा किया था। उन्हें लोगों को सुनना चाहिए और अयोध्या में राम मंदिर बनाने की मांग कोमानना चाहिए। सत्ता में बैठे लोगों को जन भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए। इस मामले में न्यायालय की प्रतिष्ठा बनी रहनी चाहिए। न्यायालय को भी लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। क्योंकि जिस देश में न्याय व्यवस्था, न्यायालय के प्रति अविश्वास हो उसका उत्थान संभव नहीं, इस पर भी अदालत को विचार करना चाहिए।”
भैया जी जोशी, सर-कार्यवाह

जय श्रीराम के नारे और सुप्रीम कोर्ट से नाराजगी

वक्ता एक-एक करके भाषण दे रहे थे और जो लोग राम मंदिर निर्माण के लिए धर्मसभा में शामिल होने आए थे. वो जय श्री राम के और मंदिर वहीं बनाएंगे के नारे लगा रहे थे. वक्ता लगातार एक बात पर जोर देते रहे कि हिंदू समाज का धैर्य खत्म हो गया है और अब सरकार अयोध्या में एक भव्य मंदिर के निर्माण के लिए संसद में कानून लाए. संतों की नाराजगी इस कदर है कि वो संसद के शीतकालीन सत्र से ज्यादा इंतजार नहीं कर सकते.यहां पहुंचे हुए लोगों की नाराजगी सुप्रीम कोर्ट से भी थी और लोग कह रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट में आतंकवादियों की सुनवाई तो आधी रात को हो सकती है लेकिन राम मंदिर का मामला उनकी प्राथमिकता में नहीं है. कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि सुप्रीमकोर्ट और संविधान की दुहाई देने वाली सरकार को भी यहां पहुंचे लोग घेरते रहे और राम मंदिर निर्माण का रास्ता सुप्रीम कोर्ट नहीं बल्कि संसद के रास्ते निकालने की बात पर जोर देते रहे. सवाल ये है कि राम मंदिर को लेकर वीएचपी और आरएसएस अचानक जब 16वीं लोकसभा का आखिरी सत्र शुरू होने से पहले  ही क्यों सक्रिय हुई.

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