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मणिपुर में गिर सकती है भाजपा सरकार, कांग्रेस ने शुरू की सत्ता में वापसी की तैयारी

नॉर्थ ईस्ट के एक महत्वपूर्ण राज्य मणिपुर में भाजपा सरकार गिर सकती है. मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी के तीन विधायक पार्टी से इस्तीफ़ा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए है. जबकि नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के चार विधायकों समेत कुल छह विधायकों ने भी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है.

60 सीटों वाली मणिपुर विधानसभा में भाजपा गठबंधन के पास कुल 32 विधायकों का समर्थन था. लेकिन अब 9 विधायकों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है जिनमें तृणमूल कांग्रेस का एक विधायक और एक निर्दलीय विधायक शामिल है. भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायक सुभाष चंद्र सिंह, टीटी हाओकिप और सैमुअल जेंदाई मुख्यमंत्री से बेहद नाराज़ थे.

अपने तीन विधायकों के पार्टी छोड़ने की बात की पुष्टि करते भाजपा प्रवक्ता विजय के मुताबिक,

“हमारे तीन विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है.अब वे लोग मतदान करने के लिए योग्य नहीं रहेंगें. दरअसल 19 जून को राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान होने है और तबतक यह उठापटक चलेगी.”

मणिपुर में कांग्रेस विश्वास मत के लिए विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाने की मांग के साथ राज्यपाल से मिलने के लिए तैयारी कर रही है. तकनीकी तौर पर देखा जाए तो 60 सीटों वाली मणिपुर विधानसभा में फ़िलहाल सदस्यों की संख्या घटकर 49 रह गई है. मणिपुर में 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 28 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई थी लेकिन 21 सीटें जीतने वाली बीजेपी सहयोगी दलों के समर्थन से राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाने में सफल रही थी.

लेकिन अब हालत एकदम उलट गए हैं. कांग्रेस के जिन सात विधायकों ने बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का समर्थन किया था, उन सभी पर अयोग्यता के मामले चल रहे हैं और हाल ही में हाई कोर्ट ने उन विधायकों को विधानसभा में प्रवेश करने से रोक दिया है. इससे पहले कांग्रेस के एक और विधायक को अयोग्य घोषित किया गया था. इस तरह कांग्रेस के कुल आठ विधायकों को पहले ही अयोग्य घोषित किया जा चुका है और बुधवार को बीजेपी के जिन तीन विधायकों ने इस्तीफ़ा दिया था उनको भी अयोग्य घोषित किया जा चुका है.

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