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कोरोना के बाद भारत करेगा जोरदार वापसी, चाहिए 111 लाख करोड़!

वित्त मंत्रालय की टास्क फोर्स ने रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के कारण व्याप्त चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था के अगले वित्त वर्ष में तेज वृद्धि के रास्ते पर वापसी की शुरुआत कर सकती है. 

कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के कारण व्याप्त चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था के अगले वित्त वर्ष में तेज वृद्धि के रास्ते पर वापसी की शुरुआत कर सकती है. टास्क फोर्स ने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि भारत की जीडीपी 5 साल (2020-21 से 2024-25) में सुस्ती से उबरकर तेजी के रास्ते पर आ जाएगा. इसकी शुरुआत वित्त वर्ष 2020-21 में हो जाएगी.

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वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) की ओर गठित गठित एक टास्क फोर्स ने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को आर्थिक वृद्धि का एक अहम बताया है. टास्क फोर्स का कहना है कि 111 लाख करोड़ रुपये के निवेश से इंफ्रा सेक्टर में नए प्रोजेक्ट्स खड़े करना व पुराने प्रोजेक्ट्स अपग्रेड करना 2025 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बुधवार को सौंपी गई टास्क फोर्स की अंतिम रिपोर्ट में कहा गया कि यह ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की सफलता के लिये विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा क्योंकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता काफी कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करती है.

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आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती की अध्यक्षता में नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP) का खाका तैयार करने के लिए बनाए गए टास्क फोर्स 2019-20 से 2024-25 के दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर में 111 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान लगाया. रिपोर्ट में कहा गया कि बुनियादी संरचनाएं तैयार करने का काम श्रम पर निर्भर है. इसलिए इससे अर्थव्यवस्था में रोजगार और आय के लिए अवसर पैदा होते हैं. जिसके चलते डिमांड में तेजी आती है. बुनियादी संरचना की प्रभावकारी क्षमता बेहतर लॉजिस्टिक्स और नेटवर्क से दक्षता में सुधार होता है, जो अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धिता को बेहतर बनाती है.

निवेश से बनेंगे ग्रोथ और रोजगार के मौके

टास्क फोर्स ने कहा, यह अर्थव्यवस्था में उच्च निवेश, वृद्धि और रोजगार सृजन का एक चक्र शुरू करने में मदद कर सकता है. रिपोर्ट में सुझाव दिया कि 2025 तक 5 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तेज वृद्धि दर सुनिश्चित करने के साथ ही बॉन्ड बाजारों को मजबूत करने, विकास वित्तीय संस्थानों की स्थापना करने और भूमि मुद्रीकरण जैसे आपूर्ति पक्ष के सुधारों की आवश्यकता है. टास्क फोर्स ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी, कार्यान्वयन और वित्त पोषण के लिए तीन समितियों की स्थापना का भी सुझाव दिया.

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