कुमाऊँ की कुलदेवी कौन हैं, उनके बारे में ये बात जानते हैं आप?


कुमाऊँ की कुलदेवी: नैनीताल के माता की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लेने के लिए नयना देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है।

मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों की नैनीताल के नयना देवी मंदिर में मंदिर में विधी विधान और पारंपरीक रिती रिवाजो के साथ प्राण प्रतिस्ठा करने के साथ ही कुमाऊँ की कुल देवी मां नंदा-सुनंदा अपने ससुराल से आज अपने मायके यानी कुमाऊँ की धरती पर पधार गईं हैं.

कुमाऊँ की कुलदेवी: नैनीताल के मां नयना देवी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं को भक्तों के दर्शनों के लिये खोल दिया गया। आज सुबह 3 बजे से नैनीताल के माता की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लेने के लिए नयना देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है। बड़ी संख्या में भक्त अपनी कुल देवियों के दर्शनों को पहुंच रहे हैं।

कुमाऊँ की कुलदेवी हैं मां नंदा-सुनंदा

मां नंदा-सुनंदा को कुमाउं में कुल देवी के रूप में पूजा जाता है। चंद राजाओं के दौर में मां नंदा-सुनंदा को कुल देवी के रूप में चंद राजा पूजा करते थे और अब संपूर्ण कुमाउं क्षेत्र के लोग मां नंदा-सुनंदा को कुल देवी के रूप में पूजते हैं। ऐसा माना जाता है कि मां नंदा और सुनंदा साल में एक बार अपने मायके यानी कुमाउं में आती हैं.

और यही कारण है कि अष्टमी के दिन यानी आज कुमाउं के विभिन्न स्थानों पर मां नंदा और सुनंदा की प्रतिमा तैयार कर प्राण प्रतिष्ठा के बाद समझा जाता है कि मां नंदा-सुनंदा अपने मायके पहुंच गई हैं। मां नंदा-सुनंदा की अगले तीन दिनों तक कुमाउं के लोग उपासना करेंगे और 7 सितंबर को भव्य डोला भ्रमण के बाद मां नंदा-सुनंदा को उनके ससुराल के लिए विदा कर दिया जाएगा।

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