इटावा: अखिलेश के चचेरे भाई अभिषेक यादव उर्फ “अंशुल” का जलवा बरकरार, बीजेपी ने क्यों डाल दिया है हथियार?

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इटावा: अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभिषेक यादव उर्फ अंशुल का एक बार फिर जिला पंचायत अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय है. वह हाल ही में हुए पंचायत चुनाव में 16254 वोटों से विजयी हुए थे.

इटावा: अभिषेक यादव का जिला पंचायत अध्यक्ष बनना तय है, जिसके चलते अपर जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश ने जानकारी देते हुए बताया है तीन दिन से नामांकन फार्म वितरित किए जा रहे है जिसमें अब सिर्फ चार नामांकन पत्र की वितरित हुए है. सभी नामांकन अभिषेक यादव के नाम से ही लिए गए है. इसके अतिरिक्त अब तक कोई भी नामांकन पत्र लेने नही आया. 26 जून दोपहर 1 बजे तक नामांकन पत्र यदि कोई लेना चाहता है तो उसको नामांकन पत्र दिए जाएंगे. 26 जून को 3 बजे तक सभी नामांकन पत्र जमा करने की आखिरी तिथि भी है.

अखिलेश यादव के लिए काफी अहम है इटावा की सीट

समाजवादी पार्टी के लिए इटावा जनपद की यह सीट इसलिए भी अहम मानी जा रही थी क्योंकि इस सीट पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के चचेरे भाई और सैफई परिवार से होने के नाते अभिषेक यादव उर्फ अंशुल इस सीट पर प्रमुख दावेदार हैं. वो जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में रिकॉर्ड वोटों से सैफई पंचायत से जीतकर आए हैं. अभिषेक के विरोधी भाजपा से प्रत्याशी अवनीश यादव को 6356 मत मिले थे.

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभिषेक यादव ने दावा किया था, कि एक बार फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर समाजवादी पार्टी का ही कब्जा होगा. और यह दावा सही भी साबित हुआ. अभिषेक यादव ने जिला पंचायत सीट पर काबिज होने के लिए अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव से गठबंधन करके चुनाव लडा था. जिसमें सपा-प्रसपा के उम्मीदवारो को रणनीति के तहत चुनाव मैदान मे उतारा गया था.

इटावा में बीजेपी हो गई फेल सपा ने फिर कर दिया खेल

इस बार इटावा जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए बीजेपी ने भी जोर आजमाइश की थी. भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रदेश अध्यक्ष स्वत्रंत देव सिंह, बीजेपी जिलाध्यक्ष अजय धाकरे की ओर से यह कहा जाने लगा कि 1989 से जिला पंचायत अध्यक्ष सीट पर सपा काबिज होती चली आ रही है लेकिन इस बार भाजपा का उम्मीदवार काबिज होगा. लेकिन भाजपा नेताओं के दावे खोखले साबित हुए क्योंकि इटावा जनपद में पंचायत के 24 वार्ड है जिनमें से भाजपा को एक वार्ड में जीत हासिल हुई.

20 वार्डो में सपा-प्रसपा के प्रत्याशी और 2 पर बसपा 1 पर निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी. जिसके बाद से यह माना जाने लगा कि सपा 1989 से लगातार इस सीट पर काबिज होती चली आ रही है. और 2021 में भी इस सीट पर बिना लड़ाई के सपा फिर से काबिज होने जा रही है. आखिरी समय तक किसी व्यक्ति ने नामांकन पत्र नही खरीदा इससे साफ हो गया कि अभिषेक यादव का फिर निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुना जाना तय हो चुका है.

अपर जिलाधिकारी जय प्रकाश के द्वारा दी गई जानकारी के बाद सपा नेताओं कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई और अभिषेक यादव को नामांकन के आखिरी दिन में लोग बधाई देने के लिए तांता लगाए दिखाई दिए सोशल मीडिया से लेकर होर्डिंग बैनरो के माध्यम से अभिषेक यादव को लोग जीत की बधाई देने उमड़ पड़े.

सत्ता पक्ष पार्टी के एक सांसद दो विधायक मिलकर भी पंचायत चुनावों में अपना कोई असर नही दिखाए इस चुनाव में हालत ऐसी हुई कि 24 वार्डो में से सिर्फ एक वार्ड जीतकर सत्ताधारी पार्टी को संतुष्ट होने पड़ा और 25 जून तक किसी दल निर्दलीय प्रत्याशी द्वारा नामांकन पत्र न खरीदे जाने के बाद तो यह साफ तौर पर दिखाई देने लगा कि सत्ताधारी पार्टी ने बीच मैदान में आकर हथियार डाल दिए.

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