लॉकडाउन लगेगा या नहीं…कोरोना से निपटने के लिए क्या कर रहे हैं पीएम मोदी?

कोरोना की दूसरी लहर से बड़ी तादाद में हो रही मौतों को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन लगेगा या नहीं इसका दबाव बढ़ता जा रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लॉकडाउन #lockdown लगाने या ना लगाने को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं. कोरोना टास्क फोर्स और दुनिया भर के तमाम महामारी एक्सपर्ट ने केंद्र सरकार को सलाह दी है की भारत में बिना लॉकडाउन के कोरोना के प्रसार को नहीं रोका जा सकता.

लॉकडाउन की मांग, क्या लॉकडाउन लगेगा

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसकी वकालत करते हुए मंगलवार को कहा, “कोरोना के प्रसार को रोकने का एकमात्र तरीका एक पूर्ण लॉकडाउन है- कमज़ोर वर्गों के लिए ‘न्याय’ की सुरक्षा के साथ.” न्याय से उनका आशय ‘न्यूनतम आय योजना’ से है, कांग्रेस ने पिछले लोकसभा चुनाव से पहले कहा था कि अगर वह चुनाव जीती तो इस योजना को लागू करेगी.

दूसरी ओर, सोमवार को अमेरिकी प्रशासन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉक्टर एंथनी फाउची ने भारतीय न्यूज़ एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में दो-तीन सप्ताह के लिए राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन लगाने की सलाह दी थी. उन्होंने कहा, “यह बिलकुल स्पष्ट है कि भारत की स्थिति बेहद गंभीर है.”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम लॉकडाउन के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव से परिचित हैं, विशेष रूप से, हाशिए के समुदायों पर इसके असर से, अगर लॉकडाउन लागू किया जाता है, तो इन समुदायों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पहले से व्यवस्था की जानी चाहिए.”

भारत सरकार पर सबसे बड़ा दबाव उन लाखों डॉक्टरों और फ्रंटलाइन स्टाफ़ का है जो देश के हज़ारों अस्पतालों में दिन-रात काम कर रहे हैं लेकिन अपनी आँखों के सामने ऑक्सीजन की कमी के कारण कई मरीज़ों को दम तोड़ते देख रहे हैं.

एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कुछ दिनों पहले ही कहा था कि देश में पिछले साल की तरह इस बार भी पूर्ण लॉकडाउन या आक्रामक लॉकडाउन लगाने की ज़रूरत है. भारत में 10 से अधिक राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और शहरों में या तो क्षेत्रीय लॉकडाउन लागू हैं या फिर रात का कर्फ्यू लगाया गया है.

लॉकडाउन को लेकर दुविधा में भारत सरकार

भारत सरकार की दुविधा ये है कि पहले जान बचाएं या अर्थव्यवस्था, लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है जिसके कारण और भी जानें जा सकती हैं और बेरोज़गारी चरम पर पहुंच सकती है. पिछले साल 24 मार्च की शाम को प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन लगाते समय कहा था कि जान है तो जहान है. लेकिन इस बार जबकि दूसरी लहर जानलेवा और भीषण है, प्रधानमंत्री लॉकडाउन से क्यों कतरा रहे हैं?

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