तपोबन टनल के बाहर 72 घंटों तक अपने मालिक का इंतजार करने वाला ‘भोटिया कुत्ता’ खूंखार भी है और वफादार भी

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उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से आई आपदा के बाद जितनी चर्चा आपदा के कारणों पर हो रही है उससे ज्यादा बात उस कुत्ते की वफादारी की हो रही है जो तपोबन टनल में मलबा भरने से फंसे अपने मालिक के इंतजार में टनल के बाहर 72 घंटों तक भूखा प्यासा बैठा रहा.

कुत्तों की वफादारी के चर्चे तो होते ही रहते हैं लेकिन जो वफादारी मिसाल बन जाए वह बहुत कम देखने को मिलती है. चमोली में ग्लेशियर फटने से आई आपदा के बाद तपोबन सुरंग के बाहर बैठे एक कुत्ते की वफादारी का चर्चा दुनिया भर में हो रहा है. दुनियाभर की मीडिया उस कुत्ते के बारे में बता रही है दिखा रही है. दरअसल यह कुत्ता जिस नस्ल का है वह नस्ल ही वफादारी के लिए जाने जाती हैं. जनपद चमोली के ऊचाई वाले गाँव जैसे नीति, माणा, मलारी,गमसाली ,रैणी ,लाता ,पाणा ,ईराणी, कनोल, सुतोल, बहुत सारे ऐसे गाँव है, जहाँ पर लगभग 3 हजार भेड़ बकरियों की सुरक्षा के लिए एक बेहतरीन बिकल्प है, यह अधिकतर ठंडे इलाके में पाले जाते हैं। बच्चों पर ये कभी नाराज नहीं होता। भोटिया या भोटी कुत्ते दरअसल तिब्बतन मस्टिफ की ही एक प्रजाति है। जो अधिकतर काले रंग के होते हैं। भारी जबड़ा,सुडोल बदन और शांत स्वभाव इनकी खास पहचान है। आम कुत्तों की तरह अनायास ही भौं-भौं नहीं करते बल्कि बड़ी सजगता से पहरेदारी करते हैं। वफादार के साथ इनके बुद्धिमान और बलवान होनी की खूबी इनको और भी खास बनाती है.

घुम्मतू भोटिया लोगों के अलावा इस प्रजाति के कुत्तों को अब आम लोग भी घर की रखवाली के लिये पालने लगे हैं। फेडरेशन ऑफ साइनोलोजिक इंटरनेशनल के अनुसार लगभग 350 नस्लों के कुत्ते पूरे विश्व में हैं। इतनी सारी नस्ल के कुत्तों के बीच भोटिया नस्ल का कुत्ता बेहद खास होता है। जितना शांत, उतना ही खतरनाक…बच्चों से प्यार करने वाला और परिवार के दुश्मनों पर पैनी निगाह रखने वाला कहा जाता भोटिया। गठीला बदन और रौबदार चेहरा देखकर आपको डर जरूर लगेगा। भोटिया की सबसे बड़ी खासियत क्या है ? आम तौर पर 6-6 महीने बकरियां लेकर बुग्याल और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले चरवाहों के पास ये कुत्ता होता है। आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन वास्तव में भोटिया की कुछ खासियत अलहदा होती हैं। बकरी पालने वाले अच्छे भोटिया कुत्ते की पहचान कैसे करते हैं ? ये भी हम आपको बता रहे हैं।

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कहते हैं जब भोटिया पैदा होकर थोड़ा सा बड़ा होता है, तो उसे बकरियों के साथ जंगलों में छोड़ दिया जाता है। अब इसे आनुवांशिक लक्षण कहें या कुछ और…भोटिया बकरी के बच्चों की सुरक्षा में लगा रहता है और मुश्किल पड़ने पर उन्हें अपने जबड़े में प्यार उठाकर वापस मालिक के पास ले आता है। इसके अलावा भेड़ों के लिये इनका बनाया सुरक्षाचक्र अभे़द्य होता है। यूं न समझिए कि इन्हें बचपन से ये सब कुछ सिखाया जाता है। ये आनुवांशिक है और वास्तव में ये चमत्कार ही है। आप किसी भी भोटिया नस्ल के कुत्तों को भेड़ों के आस-पास छोड़ दीजिए। वो खुद ही ऐसा त्रिकोणीय सुरक्षा चक्र बनाते हैं कि परिंदा भी भेड़ों पर पर नहीं मार सकता। किसी भी प्रकार के खतरे के दौरान ये बिना किसी पूर्व चेतावनी के हमला कर देते हैं। उत्तराखंड में उत्तरायण मेले पर इस नस्ल के कुत्ते खरीदे-बेचे जाते हैं। 

पहाड़ों के किस्से कहानियों में भोटिया कुत्ते की बहादुरी और वफादारी भरी पड़ी है. यह कुत्ता अपने मालिक का इतना वफादार होता है कि अपनी जान देकर भी मालिक की जान की हिफाजत करता है. तपोवन टनल के बाहर बैठे कुत्ते की तस्वीरें जैसे-जैसे सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस कुत्ते की नस्ल और इसके खूबियों के बारे में दुनिया भर में लोगों ने सर्च करना शुरू किया.

https://youtu.be/yfyf8AMwKKs

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