आरबीआई ने कहा, 2021 में भी देश की विकास दर ‘पाताल’ में ही रहेगी

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रित नीति समीति ने बताया है कि 2021 में भी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में गिरावट रहेगी. रिज़र्व बैंक के मुताबिक वर्ष 2021 के लिए जीडीपी के 9.5 प्रतिशत गिरने का अनुमान है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रित नीति समिति का अनुमान यह संकेत दे रहा है कि 2021 में भी भारत की आर्थिक हालत सुधरने वाली नहीं है. यानी जीडीपी अगले साल भी पाताल में ही रहने वाली है और मोदी सरकार के पास ऐसी कोई नीति नहीं है कि वह मौद्रित नीति समिति की बात को झुठला सकें. आरबीआई ने इसकी जानकारी देते हुए ये भी बताया कि सितंबर में महंगाई दर बढ़ी हुई रहेगी लेकिन तीसरे और चौथे चरण में इसके धीरे-धीरे कम होने की संभावना है. रिज़र्व बैंक के मुताबिक अर्थव्यवस्था में तेजी की उम्मीद बनी हुई है. अप्रैल-जून की गिरावट के बाद सुधार हो रहा है.

रेपो रेट में बदलाव नहीं

भारतीय रिज़र्व बैंक ने शुक्रवार को नई मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. आरबीआई ने चार फीसदी रेपो रेट को बरकरार रखा है. वहीं, रिवर्स रेपो रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है. रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी ही बनी रहेगी. रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है. वहीं, बैंक जब अपने पास मौजूद राशि को आरबीआई में जमा कराते हैं तो उस राशि पर आरबीआई उन्हें ब्याज देता है. ब्याज़ की इस दर को रिवर्स रेपोट रेट कहते हैं. 

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