जेईई-नीट की परीक्षा तय समय पर ही होगी चाहें कितना भी विरोध क्यों ना हो

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कोरोना वायरस महामारी के कारण जॉइंट एंट्रेंस एग्ज़ाम (जेईई) की मेन परीक्षा और मेडिकल के लिए होने वाली नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (एनईईटी) यूजी या नीट की परीक्षा परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग की जा रही थी. लेकिन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने मंगलवार को साफ़ कर दिया कि परीक्षा 13 सितंबर को ही होगी.

एनटीए ने अपनी प्रेस रिलीज़ में 17 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला दिया है जब सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षाएं स्थगित करने की याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा था कि छात्रों का क़ीमती साल ‘बर्बाद नहीं किया जा सकता है’ और ज़िंदगी चलते रहने का नाम है. इसके बाद एनटीए ने जेईई (मेन) परीक्षा का प्रवेश पत्र जारी कर दिया था जबकि एनईईटी का प्रवेश पत्र अभी जारी किया जाना बाकी है.

  • जेईई मेन की परीक्षा के परीक्षा केंद्रों को 570 से 660 कर दिया गया है.
  • एनईईटी की परीक्षा के लिए 2546 की जगह 3843 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं.
  • परीक्षाओं के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि 99 फ़ीसदी छात्रों को उनकी पहली पसंद के शहर में ही सेंटर मिले.
  • जेईई जहां कंप्यूटर आधारित परीक्षा होगी वहीं एनईईटी में पेन-पेपर से परीक्षा देनी होगी.
  • सोशल डिस्टेंसिंग बरक़रार रखने के लिए जेईई (मेन) की परीक्षा के दौरान परीक्षार्थी एक सीट छोड़कर बैठेंगे.
  • एनईईटी के परीक्षा केंद्रों में हर कमरे में 24 की जगह सिर्फ़ 12 परीक्षार्थी होंगे.

परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग की जा रही थी

कोरोना वायरस महामारी और कई राज्यों में भयंकर बाढ़ के कारण इन परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग की जा रही थी. कई मुख्यमंत्री और नेताओं ने परीक्षाओं को रद्द करने के लिए प्रधानमंत्री से आव्हान किया था. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इन परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की थी और साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की थी. डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखकर ऐसी ही मांग की. इनके अलावा ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर यही मांग की.

उधर, बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित राज्यों असम, बिहार, गुजरात, छत्तीसगढ़, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के छात्र और उनके अभिभावक आईआटी और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग कर रहे हैं.

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