2020 में आई एक और बुरी खबर,71 साल की उम्र में कोरियोग्राफर सरोज खान का निधन

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार कल देर रात उन्हें दिल का दौरा पड़ा जिसके बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका. उनके निधन पर फिल्म जगत की तमाम हस्तियों ने शोक जताया है.

हिंदी फिल्मों की मशहूर नृत्य निर्देशिका (कोरियोग्राफर) सरोज खान का निधन हो गया है. वे 71 साल की थीं. सरोज खान पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं. 20 जून को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद उन्हें मुंबई के बांद्रा स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्होंने तेजाब के ‘एक दो तीन’ और मिस्टर इंडिया के ‘हवा हवाई’ से लेकर जब वी मेट के ‘ये इश्क हाए’ तक सरोज खान ने कई मशहूर गीतों का नृत्य निर्देशन किया था .

3 साल की उम्र में शुरू हुआ था फिल्मी करियर

मुंबई में जन्मी सरोज खान का तीन साल की उम्र में फिल्मी करियर शुरू हुआ. फिल्म थी 1951 में आई नजराना. 1950 के दशक में कई फिल्मों सरोज खान बैकडांसर रहीं. बाद में उन्होंने मशहूर कोरियोग्राफर बी सोहनलाल के साथ काम करते हुए डांस सीखा और फिर इसी विधा की तरफ मुड़ गईं.पहले उनका नाम नम्रता नागपाल हुआ करता था. कुछ फिल्मों में बतौर असिस्टेंट कोरियोग्राफर के तौर काम करने के बाद उन्हें 1974 में आई फिल्म गीता मेरा नाम में स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका मिला.

1987 में आई मिस्टर इंडिया से जब उनके द्वारा निर्देशित गाना ‘हवा-हवाई’ हर तरफ छा गया. इसके बाद तेजाब, नगीना, चांदनी और बेटा जैसी फिल्मों के साथ जो सिलसिला शुरू हुआ उसने सरोज खान को बॉलीवुड के चोटी के नृत्य निर्देशकों की जमात में पहुंचा दिया. सरोज खान की आखिरी फिल्म कलंक थी जिसमें उन्होंने माधुरी दीक्षित के गाने ‘तबाह हो गई’ को निर्देशित किया था. सरोज खान को तीन बार बेस्ट कोरियोग्राफी का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. यह उन्हें देवदास और जब वी मेट के अलावा तमिल फिल्म श्रृंगारम के लिए मिला. देवदास का ‘डोला रे डोला’ और जब वी मेट का ‘ये इश्क हाए’ गीत उन्हीं के खाते में है. हाल के समय में सरोज खान टीवी पर होने वाले डांस रियलिटी कार्यक्रमों में जज के तौर पर दिखी थीं. 

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