#TheCandidates : ‘जनता के दिलों में जगह बनाना मकसद, लेकिन पॉलिटिक्स में पैसा बोलता है’

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‘राजनीति ने हमें सेवा भाव सिखाया है. मेरे घर में सभी सरकारी कर्मचारी हैं, मेरे बाबा प्रधान रहे हैं और उन्हीं से राजनीति में आने की प्रेरणा मिली. राजनीति ने ही हमारे अंदर सेवाभाव पैदा किया और लॉकडाउन के समय में ऐसी विषम परिस्थियों में हम लोगों की सेवा उसी भाव की वजह से कर रहे हैं.’

रवि श्रीवास्तव बहराइच सदर विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी के लिए काम कर रहे हैं. कोरोना काल में जब देश में लॉकडाउन है तो वो अपने क्षेत्र में लोगों के बीच जाकर उनके दुख दर्द में शरीक हो रहे हैं. पिछले 10 सालों से वो राजनीति कर रहे हैं और आगे बढ़ने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

‘कोरोना की वजह से दो वर्ग हताश हुए हैं. एक गरीब और दूसरा मध्यम वर्ग. हम जब लोगों के बीच सामिग्री बांटने जाते हैं तो कुछ ऐसे लोग भी मिलते हैं तो मदद मांगने से झिझकते हैं. उन्होंने कहा कि, उदाहरण देखें तो बिजली का बिल लगातार बढ़ रहा है और जब लॉकडाउन खुलेगा तो ये बिजली का बिल भी बोझ बन जाएगा. क्योंकि लॉकडाउन में मध्यम वर्ग पिस रहा है और वो किसी से कह भी नहीं पा रहा.’

रवि श्रीवास्तव बताते हैं कि ‘बहराइच सदर में हमने 3 हजार मास्क और 500 पैकेट भोजन जरूरतमंदों के बीच बंटवाया है. हम लॉकडाउस से पहले भी लोगों के बीच जाकर उनके दुख दर्द में शामिल हुए हैं उनके साथ खड़े हैं. 14 नवंबर 2019 को हमने अपने क्षेत्र में प्राइमरी स्कूल के बच्चों के बीच जाकर के उन्हें पाठ्य सामिग्री वितरित की थी.’

जमीन तक नहीं पहुंच रही सरकारी मदद

केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार सभी ये दावा कर रही हैं कि वो गरीबों और मजदूरों के साथ खड़े हैं. सिस्टम ने सभी को भोजन देने की योजना बनाई है. लेकिन रवि बताते हैं कि उनके क्षेत्र में जरूरत भर की भी मदद नहीं पहुंच रही. उनके मुताबिक ‘गेंहूं और चावल खाकर गरीब जीवन नहीं काट पाएगा. गेंहूं को पिसवाना भी पड़ेगा. रोटी और चावल के साथ चटनी सब्जी भी तो होनी चाहिए. सरकार 15 किलो दे रही है लेकिन पांच लोगों का परिवार महीनाभर 15 किलो में क्या पेट भर पाएगा ? सरकार ने एलान किया है लेकिन उसका फायदा बहुत ज्यादा गरीबों को नहीं हो पाया है’

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रवि अपनी बात में आगे जोड़ते हुए कहते हैं कि ऐसे समय में कांग्रेस की ‘न्याय’ जैसी योजना काफी कारगर होती. उन्होंने बताया कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में साढ़े तीन लाख मतदाता हैं. चुनाव के दौरान हमनें ‘न्याय योजना’ के बारे में लोगों को बताया था. और उसका फायदा हमें मिला लेकिन हम अपनी कुछ गलतियों की वजह से चुनाव नहीं जीत पाए. उन्होंने ये भी कहा कि जिन इलाकों में हमने ‘न्याय’ के बारे में लोगों को ढंग से समझाया वहां वोट बहुत अच्छा मिला था.

जमीन पर काम करने वालों को मौके कम मिलते हैं

रवि को एक बात की शिकायत भी है कि आधुनिक राजनीति में पैसे का मोल बढ़ गया है और अपनी जगह बनाने के लिए जनता के दिलों में जगह बनाना जरूरी है. वो बताते हैं ‘रास्ते तो नहीं मिलेंगे. ये आधुनिक राजनीति हैं और हर बड़ा नेता सोचता है उसका बेटा ही आगे आए. लेकिन ऐसे समय में अगर हमारे जैसे युवा नेता जमीनी स्तर पर जनता जनार्दन के दिलों में जगह बना पाएं और खुद को साबित कर पाएं तो हमें कोई नकार नहीं सकता. कोई इग्नोर नहीं कर सकता.’

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रवि ने बताया कि ‘आज की राजनीति में धन का बड़ा महत्व है. अगर मैंने उस हिसाब से धन खर्च नहीं किया जिस तरह से हमारे विरोधी नेता ने किया तो हम आज राजनीति में बहुत आगे होते. आज की पॉलिटिक्स में धन का बहुत महत्व है. आप ये कह सकते हैं जो कितना पैसा खर्च करेगा वो उतनी अच्छी राजनीति कर पाएगा. पहले मुझे नहीं पता था कि धन का इतना बड़ा रोल होता है पॉलिटिक्स में. क्योंकि हमें बिना पैसा खर्च किए ही काफी वोट मिला था. मुझे लगता है कि कोई नेता ग्रास रुट पर काम करते हुए अगर चुनाव में पैसा भी खर्च करता है तो वो जनता को लुभा सकता है और उसका वोट ले सकता है.’

रोजगार और शिक्षा के अवसर शून्य हैं

रवि बताते हैं ‘आज की तारीख में मध्यम वर्ग भी गरीब ही हो गया है लेकिन कोई उसे गरीब कहता नहीं है. गरीब के प्रति लोगों में ज्यादा भावनाएं होती हैं लेकिन मध्यम वर्ग के लिए जो सरकार बनता है उसकी उपेक्षा हो रही है. मेरे क्षेत्र में यानी बहराइच सदर इलाके में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर शून्य हैं. यहां रोजगार की संभावना हैं नहीं और युवा बाहर जाकर रोजगार करते हैं. दूसरी समस्या ये है कि हमारे यहां शिक्षा भी निचले स्तर पर है. हमारे यहां प्राइवेट कॉलेज तो बहुत हैं लेकिन वहां शिक्षा का स्तर अच्छा नहीं है.’

‘हम युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए हम उनके साथ व्यक्तिगत संवाद कर रहे हैं. और उनकी समस्याओं को अपनी समस्या समझते हैं. हमारे क्षेत्र में करीब 1.50 लाख से ज्यादा युवा आबादी है और वो निर्णायक भूमिका में है. मैंने 2017 का विधानसभा और 2019 का लोकसभा चुनाव देखा है जिसमें युवाओं की भूमिका अहम रही है. इसलिए मैं अपने विधानसभा में 400 बूथों पर 400 युवाओं को खड़ा किया है. जो अपने नीचे टीम बना रहा है. मैंने 400 युवाओं से शुरुआत की है. और मैं उनसे लागातर संवाद कर रहा हैं. मैंने ऐसे युवाओं को अपने साथ जोड़ा है जो देश हित में सोचते हैं.’

आखिर में आपको ये भी बताना चाहता हूं कि ‘अगर मैं क्षेत्र में चुना जाता हूं तो बहराइच में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए काम करूंगा और नए कॉलेज खुलवाने का काम भी करूंगा. मैं अपने युवा साथियों के साथ मिलकर अपने क्षेत्र में लोगों को हो रही समस्याओं के बारे में सदैव सचेत रहता हूं.’

ये रिपोर्ट #TheCandidates सिरीज़ का हिस्सा है. #TheCandidates की रिपोर्ट के ज़रिए हमारी कोशिश उन युवाओं के जीवन में झांकने की है जिन्होंने समाज की सेवा करने के लिए राजनीति करने का फैसला किया, जब राजनीति चंद नेताओं की चकाचौंध में सिमट गई है तब क्या कर रहे हैं जमीन पर काम करने वाले नेता.

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