‘गार्जियन’ बने राहुल गांधी, वायनाड समेत 30 सीटों का बदला समीकरण

rahul in kerala

@rahulgandhi

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की रणनीति साफ नजर आ रही है. कांग्रेस का फोकस दक्षिण भारत पर है. पार्टी के मुखिया वायनाड से चुनाव लड़ रहे हैं जाहिर है इससे केरल कर्नाटक और तमिलनाडु की सीटों पर कांग्रेस को फायदा मिलेगा.

वायनाड लोकसभा सीट केरल की 20 सीटों में से एक सीट है. 23 अप्रैल यानी तीसरे चरण में यहां मतदान होगा. अभी तक केरल में राजनीति तिरुवनंतपुरम से होती थी लेकिन अब वायनाड में राहुल गांधी के जाने से केरल के समीकरण बदल गए हैं. मौजूदा समीकरण देखकर लगता है कि राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने का असर सिर्फ इस सीट पर ही नहीं बल्कि वायनाड के दायरे में आने वाले करीब 150 किमी इलाके में पड़ रहा है.

दो राज्यों से सटा हुआ है वायनाड

कर्नाटक और तमिलनाडु से वायनाड की सीमाएं लगती है. लिहाजा राहुल गांधी की योजना के मुताबिक वो इस एक सीट से तीन राज्यों की 30 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस को फायदा पहुंचा सकते हैं. राहुल गांधी के वायनाड में होने से कर्नाटक के चामराजनगर, मैसूर, मांड्या, दक्षिण कन्नड़, हासन, उडुपी, चिकमंगलूर और तमिलनाडु के नीलगिरि, कोयम्बटूर, त्रिपुर और इरोड पर हो असर होगा ही केरल की सभी 20 लोकसभा सीटें भी प्रभावित होंगी.

राहुल हैं हमारे ‘गार्जियन’

वायनाड लोकसभा सीट पर हुए दो चुनाव में कांग्रेस ने ही जीत दर्ज की है. यहां हुए दो चुनावों में कांग्रेस के एमआई शाहनवाज जीते लेकिन उनकी मृत्यु के बाद ये सीट खाली है. राहुल के मुकाबले में एलडीएफ ने पीपी सुनरी (CPI) और NDA ने तु‌षार वेल्लापल्ली जो (BDJS) से हैं खड़े हुए हैं. इस लोकसभा सीट पर मुस्लिम लीग की भी अच्छी पकड़ है. अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा 40% मुस्लिम, 40% क्रिश्चियन, 10% हिन्दू (ओबीसी) व 10 फीसदी दूसरी जातियां हैं. सबसे दिलचस्प बात ये बात ये है कि यहां के आदिवासी राहुल गांधी को ‘गार्जियन’ के तौर पर देख रहे हैं.

आपको ये भी बता दें कि केरल में तीन गठबंधन है जिसमें करीब 17 दल हैं. पहला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी एलडीएफ है. एलडीएफ में 8 दल हैं इसमें सीपीआई, सीपीएम, मणि कांग्रेस, केरला कांग्रेस (बी), इंडियन नेशनल लीग, डेमोक्रेटिक केरल कांग्रेस और लोकतांत्रिक जनता दल शामिल हैं.

दूसरा यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी यूडीएफ. इसमें कुल 6 दल हैं. कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस (एम), केरल कांग्रेस (जैकब), रेवोल्यूशनरी सोशल पार्टी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक शामिल हैं.

तीसरा नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस यानी एनडीए इसमें कुल 3 दल है. भाजपा, धर्म जनसेना, केरला कांग्रेस (पीसी थॉमस) हैं

राजधानी तिरुवनंतपुरम किससे हैं मुकाबला

यहां से कांग्रेस ने एक बार फिर से शशि थरूर को टिकट दिया है. थरूर का मुकाबला सीपीआई के वरिष्ठ नेता सी दिवाकरन से है. हालांकि बीजेपी भी यहां सबरीमला के मुद्दे को लेकर अपनी दावेदारी ठोंक रही है. चुंकि ये हिंदू बहुल इलाका है लिहाजा बीजेपी को यहां बेहतर की उम्मीद है. बीजेपी ने यहां कुम्मानमन राजशेखरन को टिकट दिया है. राजशेखरन ने ही 1991 में हाईकोर्ट में सबरीमाला मुद्दे की सुनवाई के दौरान सभी अधिकारियों को पत्र लिखा था कि मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित होना चाहिए. कुम्मानमन पहले ऐसा नेता है जिन्होंने इस मामले का राजनीतिकरण किया.

सबरीमला का मुद्दा कितना फर्क डालेगा

ताजा घटनाक्रम को देखें तो सबरीमला का मुद्दा तिरुवनंतपुरम और पथनामथिट्‌टा को ही प्रभावित कर रहा है. पथनामथिट्‌टा क्रिश्चियन प्रभाव वाला इलाका है. कांग्रेस के एंटो एंटनी दो बार से जीते है और एक बार फिर से लड़ रहे हैं लेकि बीजेपी ने सुरेन्द्रन को टिकट दिया है जो सबरीमाला आंदोलन में गिरफ्तार हुए थे. ऐसे में उनके लिए यहां सहानुभूति दिखती है.

कन्नूर सीट की बात करें तो ये वीआईपी सीट है क्योंकि यहां से खुद मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन आते हैं. एक बार और आपको बता दें कि सबसे ज्यादा राजनीति हत्याएं भी इसी सीट पर हुईं हैं. और यहां पर कांग्रेस की सीधी टक्कर सीपीएम के साथ है.

वडाकरा और कोझीकोड लोकसभा सीट की बात करें तो वडाकरा सीपीएम का गढ़ था लेकिन कांग्रेस ने यहां अपनी ताकत बढ़ाई है. बीते दो चुनाव से यहां कांग्रेस के मुल्लाप्पल्ली रामचंद्रन जीत रहे हैं. इस बार यूडीएफ ने मुरलीधरन जो कांग्रेस हैं उन्हें मैदान में उतारा है. एलडीएफ ने पी जयराजन को टिकट दिया है. जयराजन माकसा से आते हैं. यहां आप ये भी समझ लें कि माकपा उम्मीदवार जयराजन पर दो हत्याएं करवाने का गंभीर आरोप हैं. कोझीकोड लोकसभा सीट पर भी कांग्रेस मजबूत है. कांग्रेस के एमके राघवन यहां से लड़ रहे हैं.

मलप्पुरम और पोन्नानी मुस्लिम लीग का गढ़

ये दोनों लोकसभा सीटें मुस्लिम बहुल आबादी वाली हैं और यहां से 55 से 70 फीसदी आबादी मुस्लिम है. पिछले दो बार से मुस्लिम लीग जीत रही है. चुंकि ये इलाका पल्लकड़ तमिलनाडु बॉर्डर से सटा हुआ है लिहाजा इसको केरल का गेटवे कहते हैं. वैसे तो ये सीपीएम का गढ़ था लेकिन इश बार एलडीएफ और यूडीएफ में कांटे की टक्कर है.

वो सीटें जहां फिल्मी सितारे हैं मैदान में

त्रिशूर और चलाकुड़ी ये दो ऐसी सीटें हैं जहां सितारे मैदान में हैं. त्रिशूर से बीजेपी की टिकट पर लोकप्रिय मलयाली अभिनेता सुरेश गोपी लड़ रहे हैं और चलाकुड़ी में एक्टर इनोसेंट वीटी फिर से मैदान में हैं. वीटी एलडीएफ की टिकट पर मैदान में हैं. अलाथुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस की प्रत्याशी राम्या हरिदास मैदान में हैं. आपको बता दें कि राम्या, राहुल गांधी के ‘टेलैंट हंट’ प्रोग्राम की टॉपर हैं. राम्या अगर मैदान मारती है तो केरल की दूसरी दलित महिला सांसद होंगे. राम्या को ये उपलब्धि हासिल करने के लिए सीपीएम के पीके बीजू को हराना है जो आसान कतई नहीं है क्योंकि वो दो बार से चुनाव जीत रहे हैं. इसी तरह मावलिक्करा लोकसभा सीट कांग्रेस की सीट मानी जाती है और यहां कांग्रेस 2004 को छोड़कर 1989 से जीतती आ रही है. हालांकि इस बार यहां पर सबरीमाला मुद्दे का असर दिखता है.

क्या है सबसे बड़ा फैक्टर ?

बाढ़ की वजह से लोग गुस्से में हैं. फिर फिर भी केरल में राहुल गांधी सबसे बड़ा फैक्टर हैं. राहुल गांधी के बाद नारियल, रबड़ और कॉफी के सही दाम न मिलने का मुद्दा है लेकिन राहुल नंबर वन हैं. सबरीमाला का मुद्दा ज्यादा बड़ा नहीं है लेकिन भाजपा इसी के बूते लोकसभा चुनाव में खाता खोलने की उम्मीद लगाए बैठी है. ये भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि मुस्लिम कांग्रेस, क्रिश्चियन यूडीएफ और ओबीसी-दलित वर्ग के लोग एलडीएफ को वोट करेंगे. धार्मिक लिहाज से देखें तो तिरुवनंतपुरम और पथनामथिट्‌टा में इस आधार पर वोट बंट रहा है.

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