उत्तराखंड : देवभूमि में किस दल का है दबदबा, जानिए पांचों सीटों का गणित

Uttarakhand election

पल-पल बदलते परिवेश में राजनीति बेहद रंगीन हो गई है. उत्तराखंड में इस बार बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंकी है. देवभूमि के मुद्दों को उठाने में कोई दल पीछे नहीं है लेकिन 2019 में उत्तराखंड की सियासत पर दबदबा किसका है ये समसझा आसान नहीं है.

उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों पर 11 अप्रैल को पहले चरण में वोट डाले जाएंगे. चुनावी मौसम में लहरों पर सवारी करने वाले पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मोदी लहर बनाने की कोशिशें जारी हैं. वहीं दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारी कांग्रेस दिग्गजों के दलबदल, लचर संगठन और संसाधनों की कमी के बावजूद भी जीत का दावा कर रही है.

मुकाबले की तासीर है अलग

इसमें कोई दोराय नहीं है कि उत्तराखंड में बीजेपी ने प्रचार प्रसार में कांग्रेस से बढ़त बनाई है. लेकिन फिर भी देवभूमि का इतिहास रहा है कि यहां कभी भी एक तरफा मतदान नहीं हुआ है. 2014 में अगर बीजेपी ने यहां पर सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज की तो 2009 में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा था. उत्तराखंड के कुंमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों में इस बार मुकाबला पेचीदा है. गढ़वाल की दो लोकसभा सीटों पर मुकाबला तिकोना है और कुंमाऊं की दो सीटों पर कांटे की टक्कर है.

उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों का गणित

पौड़ीः इस लोकसभा सीट पर जनरल खंडूरी बीजेपी से मौजूदा सांसद हैं लेकिन खंडूरी के बेटे मनीष को कांग्रेस ने टिकट दिया है. मनीष खंडूरी के सामने पिता के करीबी बीजेपी के तीरथसिंह रावत हैं. तीरथ जमीनी नेता हैं और संगठन के साथ चुनाव प्रबंधन भी अच्छा है. इस लोकसभा सीट पर मोदी-मोदी तो हैं लेकिन युवा मनीष के साथ खड़े नजर आते हैं.

टिहरीः बीजेपी ने यहां से रानी माला राजलक्ष्मी को तीसरी बार मैदान में उतारा है. रानी माला के बारे में कहा जाता है कि उनकी सांसद निधि खर्च नहीं होती, जनता के बीच भी नहीं जाती, खुद चैरिटी करती हों ऐसा भी नहीं, लेकिन उन्हें वोट खूब मिलते हैं. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को यहां से टिकट दिया है. यहां पहली बार राजवंश बनाम लोकतंत्र का नारा बुलंद हो रहा है. बीजेपी यहां कांग्रेस से मजबूत है क्योंकि यहां बीजेपी का संगठन मजबूत है.

हरिद्वारः बीजेपी ने यहां एक बार फिर से पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को टिकट दिया है. निशंक काफी सक्रिय हैं और उनके पास यहां जनता को बताने के लिए काफी कुछ हैं. निशंक का मुकाबला कांग्रेस के पूर्व विधायक अम्बरीश कुमार और बसपा के अंतरिक्ष सैनी से है. करीब ढाई लाख कैडर वोट, डेढ़ लाख सैनी वोट और सपा के पांच लाख से ऊपर मुस्लिम मतों पर बसपा की उम्मीद टिकी है. लेकिन कांग्रेस को उम्मीद है कि मुस्लिम वोट हाथ का बटन दबाएगा.

अल्मोड़ाः मुकाबला यहां भी दिलचस्प है. पहाड़ के आदमी को रोटी चाहिए, रोजी यहां है नहीं. रोजगार की भी किल्लत है. लेकिन नेताओं के भाषणों में रोटी और रोजगार का जिक्र नहीं है. यहां केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा को मुकाबला कांग्रेस के प्रदीप टम्टा से है. बीजेपी यहां जीतने की पूरी कोशिश कर रही है. सीएम की 6 सभाएं हो चुकी हैं. 11 विधायक मोर्चे पर हैं. कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप टम्टा पढ़े-लिखे इंटेलेक्चुअल छवि वाले हैं. लिहाजा टक्कर कांटे की है.

नैनीतालः इस बार यहां बीजेपी की परीक्षा है. हालांकि बीजेपी यहां काफी मजबूत है क्योंकि ये इलाका सांसद भगत सिंह कोश्यारी का गढ़ है. लेकिन फिर भी कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मैदान में हैं. और मुकाबला कांटे का है. बीजेपी ने यहां से कोश्यारी की जगह प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को टिकट दिया है. पिछले विधानसभा चुनाव में हरीश रावत मुख्यमंत्री होते हुए किच्छा सीट भी नहीं बचा पाए थे और अजय भट्ट भाजपा की लहर में भी रानीखेत से हार गए थे. दोनों पार्टियो ने दो हारे हुए नेताओं पर दांव लगाया है. लेकिन यहां अहम भूमिका होगी भगत सिंह की.

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